अतुल्य भारत चेतना (मृत्युंजय मिश्रा)
सतना: शहर में सट्टा और जुआ के खिलाफ पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद, इस अवैध कारोबार का जाल पूरी तरह से टूटने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में पुलिस ने सट्टा अड्डे चलाने वाले प्रमुख आरोपियों अग्गा सिंधी और आशिक सिंधी को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। उनके कई गुर्गे भी हिरासत में हैं, और यह कार्रवाई शहर की जनता के लिए एक राहत की सांस लेकर आई थी। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि जब बड़े नाम पकड़े जा चुके हैं, तो फिर सट्टा का खेल क्यों नहीं रुक रहा? सूत्रों के मुताबिक, शहर के पुराने सट्टेबाज “पंजू” का अड्डा अब भी चालू है, और इसकी वजह पुलिस के कुछ अधिकारियों से उसकी कथित सांठगांठ बताई जा रही है।
पिछले कुछ दिनों में सतना पुलिस ने सट्टा-जुआ के खिलाफ अभियान छेड़ा है, जिसमें कई छापेमारी की गईं। अग्गा सिंधी और आशिक सिंधी जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की गिरफ्तारी से लग रहा था कि शहर को इस नासूर से मुक्ति मिल जाएगी। इन आरोपियों पर आरोप है कि वे शहर के विभिन्न इलाकों में सट्टा अड्डे संचालित कर रहे थे, जहां लाखों रुपये का दांव लगाया जाता था। पुलिस ने उनके पास से नकदी, मोबाइल फोन और सट्टा से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं। लेकिन इन गिरफ्तारियों के बाद भी शहर के गली-मोहल्लों में सट्टा का कारोबार सुचारू रूप से चल रहा है, जो पुलिस की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, “पंजू” नामक सट्टेबाज, जो वर्षों से इस कारोबार में सक्रिय है, का अड्डा अब भी सक्रिय है। चर्चाओं में कहा जा रहा है कि पंजू को “खाकी” (पुलिस) का संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही। उच्च अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बावजूद, जिम्मेदार पुलिसकर्मी इस अड्डे की ओर आंख मूंदे हुए हैं। क्या यह संरक्षण पंजू को कानून से ऊपर रख रहा है? या फिर पुलिस की कार्रवाई सिर्फ चुनिंदा नामों तक सीमित है, जबकि बड़ा नेटवर्क अब भी अछूता है?
शहर के निवासियों में इस मुद्दे को लेकर गहरा असंतोष है। कई स्थानीय लोगों ने बताया कि सट्टा-जुआ न केवल युवाओं को बर्बाद कर रहा है, बल्कि परिवारों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पुलिस की कार्रवाई अच्छी है, लेकिन अगर सभी सट्टेबाजों पर समान रूप से शिकंजा नहीं कसा गया, तो यह सब दिखावा ही साबित होगा। पंजू जैसे लोग अभी भी खुलेआम कारोबार कर रहे हैं, और पुलिस को पता है।”
पुलिस प्रशासन से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जांच जारी है। सवाल यह है कि क्या पुलिस इस पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाएगी? या फिर संरक्षण और सांठगांठ के चलते सट्टा का खेल यूं ही चलता रहेगा? शहर की जनता अब पुलिस से स्पष्ट जवाब मांग रही है। क्या उच्चाधिकारियों द्वारा कोई विशेष जांच टीम गठित की जाएगी, या सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे?
इस मामले की गहराई से जांच की मांग उठ रही है, ताकि सट्टा-जुआ जैसे अवैध कारोबार को जड़ से उखाड़ा जा सके। अतुल्य भारत चेतना इस मुद्दे पर नजर रखे हुए है और आगे की अपडेट्स जल्द ही लाएगा। (यदि आपके पास कोई जानकारी है, तो हमें संपर्क करें आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।)

