कीमती धातुओं के बाजार में चांदी ने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। बुधवार को चांदी की कीमतों में एक ही दिन में 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद यह 2.56 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले चांदी कभी भी इस स्तर पर नहीं पहुंची थी। कीमतों में आई इस जोरदार तेजी से निवेशकों, सर्राफा कारोबारियों और औद्योगिक उपयोग से जुड़े क्षेत्रों में खासा हलचल देखने को मिल रही है।
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अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेत प्रमुख कारण हैं। वैश्विक स्तर पर डॉलर में कमजोरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी है। सोने के साथ-साथ चांदी को भी सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदा जा रहा है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आई है।
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औद्योगिक मांग ने बढ़ाया दबाव
चांदी केवल आभूषण या निवेश का माध्यम ही नहीं है, बल्कि इसका उपयोग सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और चिकित्सा उपकरणों जैसे कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। हाल के महीनों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने से चांदी की औद्योगिक खपत में इजाफा हुआ है। मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने के कारण कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।
घरेलू बाजार में मजबूत खरीदारी
सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि घरेलू स्तर पर भी चांदी में मजबूत खरीदारी देखी जा रही है। निवेशक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के बीच चांदी को दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रहे हैं। इसके अलावा शादी-ब्याह के सीजन और आने वाले त्योहारों को देखते हुए आभूषण निर्माताओं की ओर से भी अग्रिम खरीद बढ़ी है।
निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक हालात, डॉलर की चाल और औद्योगिक मांग को देखते हुए लंबे समय में इसमें मजबूती की संभावना जताई जा रही है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश करें।
आम उपभोक्ता पर असर
चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। चांदी के आभूषण, बर्तन और अन्य वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। वहीं, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए भी कच्चे माल की लागत बढ़ने से चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, चांदी की कीमतों का 2.56 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना बाजार में बदलते रुझानों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तेजी कितनी टिकाऊ साबित होती है और बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।


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