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गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए देश भर से जुटा संत समाज

संवाददाता: जितेंद्र कुमार
अतुल्य भारत चेतना

जयपुर/राजस्थान: जयपुर से गौ सम्मान आह्वान अभियान को राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प!

जयपुर के सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया से रविवार को ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ की शुरुआत की गई। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे संतों, गोभक्तों और गोसेवकों की मौजूदगी में इसे राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। अभियान को अहिंसक रखने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य गौ सेवा और गौ संरक्षण से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।

सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ किसी बैनर या मंच के तहत नहीं चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य गोमाता को राष्ट्र माता का संवैधानिक दर्जा दिलाने, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गोवर्धन आधारित संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रभावी सरकारी नीतियां बनवाने से जुड़ा है।

कार्यक्रम में मौजूद संतों और गोसेवकों ने केंद्र सरकार से गौ रक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग रखी।
कार्यक्रम में मौजूद संतों और गोसेवकों ने केंद्र सरकार से गौ रक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग रखी।
निजी संपत्ति को नहीं पहुंचाएंगे नुकसान भारतीय गौ क्रांति मंच के प्रदेश अध्यक्ष ताराचंद कोठारी ने बताया- अभियान पूरी तरह अहिंसक रहेगा। इसमें न मंच होगा, न भाषण और न ही किसी तरह की सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाएगा। आंदोलन का प्रतीक केवल नंदी महाराज और गोमाता का चित्र रहेगा। संदेश संकीर्तन, प्रार्थना और जनजागरण के जरिए समाज और सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया- कार्यक्रम में अभियान के स्वरूप और आगे की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें तय किया गया कि यह आंदोलन किसी संगठन, संस्था या राजनीतिक दल के नाम पर नहीं चलेगा। बल्कि गोमाता और नंदी महाराज के नाम से चलेगा। यह समाज से जुड़ा हुआ, शांतिपूर्ण और जनभागीदारी वाला अभियान है।

गौ रक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग कार्यक्रम में मौजूद संतों और गोसेवकों ने केंद्र सरकार से गौ रक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग रखी। इसके साथ ही गोहत्या और गोतस्करी में शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करने, जब्त किए गए वाहनों का उपयोग गोशालाओं के हित में करने जैसे सुझाव भी सामने रखे गए।
उद्योग, मंदिर और बाजार में गौ आधारित व्यवस्था पर जोर सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटन से पहले उनसे जुड़ी कम से कम एक गौ सेवा गतिविधि अनिवार्य हो। सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में भोग, आरती, पूजा और प्रसाद के लिए देसी गौमाता के दूध, दही और घी के उपयोग पर जोर दिया गया। साथ ही बड़े शॉपिंग मॉल्स में गौ आधारित कृषि उत्पाद, देसी डेयरी और गोमूत्र उत्पादों के लिए अलग काउंटर बनाने की बात भी रखी गई।

गौ आंदोलन में महिलाएं निभाएंगी अहम भूमिका कार्यक्रम में महामंडलेश्वर पुष्पा बाई और कमल दीदी ने महिलाओं की भागीदारी को आंदोलन के लिए जरूरी बताया। उन्होंने बताया कि जब महिलाएं बड़ी संख्या में इस तरह के अभियानों से जुड़ती हैं तो पूरा परिवार स्वतः इससे जुड़ जाता है और आंदोलन को समाज में गहरी पकड़ मिलती है।
15 अगस्त 2027 तक चलेगा शांतिपूर्ण आंदोलन

अभियान की कार्ययोजना के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 तक देशभर में प्रचार-प्रसार किया जाएगा। अप्रैल 2026 में हर तहसील और जिला मुख्यालय पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। अपेक्षित उत्तर नहीं मिलने पर जुलाई और अक्टूबर 2026 में चरणबद्ध प्रयास होंगे। 27 फरवरी 2027 को देश के 800 जिलों और 5000 तहसीलों से संतों और गोभक्तों का दिल्ली में समागम प्रस्तावित है। इसके बाद 15 अगस्त 2027 तक छह माह का शांतिपूर्ण गौ संकीर्तन किया जाएगा।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद कार्यक्रम में कमल दीदी, प्रकाश दास महाराज, गोपाल मणि, प्रकाश नारायण, चंद्रमा दास, सोमेश्वर महाराज, वरिष्ठ स्वयंसेवक सुगन सिंह, महामंडलेश्वर पुष्पा माई, ताराचंद कोठारी, धीरज भारद्वाज, कमल स्वामी, गौ सांसद आशीष मीणा सहित बड़ी संख्या में गौ सेवक और गोभक्त मौजूद रहे। आयोजन समिति ने देशभर के गौप्रेमियों, संतों, गोसेवकों और आम नागरिकों से इस आंदोलन से जुड़ने की अपील की है। ।
संतों द्वारा सरकार को चेतावनी
राजस्थान की राजधानी जयपुर में गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर धर्म सभा आयोजित की गई. इस धर्म सभा में देश के तमाम बड़े संत महात्मा के साथ कई अखाड़ों के महामंडलेश्वर और आचार्य व पीठाधीश्वर के साथ ही अलग अलग परंपराओं के संत शामिल हुए. गौ माता उच्च अधिकार समिति की तरफ से आयोजित की गई इस धर्म सभा में मुख्य रूप से यह फैसला किया गया कि अगर सरकार ने 3 महीने में उनकी मांगे नहीं मानी तो संत महात्मा मार्च महीने में दिल्ली कूच करेंगे।

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News Desk

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