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आगर मालवा में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन प्रभावित किया

अतुल्य भारत चेतना (दीपक शर्मा)

आगर मालवा। जिले में रविवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिसने विजिबिलिटी को बेहद कम कर दिया। सुबह के समय दृश्यता मात्र 50 मीटर तक सिमट गई, जिससे सड़कों पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई जगहों पर उन्हें हेडलाइट्स व फॉग लाइट्स जलाकर अत्यंत सावधानी से वाहन चलाने पड़े। इससे वाहनों की रफ्तार काफी धीमी हो गई और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया।

तापमान और मौसम में अचानक बदलाव

जिले में रविवार को न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले कुछ दिनों तक मौसम साफ-सुथरा था और दिन में निकलने वाली धूप से ठंड से कुछ राहत मिल रही थी। लेकिन रविवार की सुबह अचानक मौसम ने करवट ली। घने कोहरे के साथ वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई, जिससे ठंड का प्रभाव और अधिक तीव्र महसूस हुआ। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए और सुबह की सामान्य दिनचर्या भी बाधित रही।

रविवार को साप्ताहिक छुट्टी होने के कारण सभी स्कूल बंद रहे, जिससे छोटे बच्चों को कड़ाके की ठंड और कम दृश्यता की स्थिति में स्कूल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। अभिभावकों ने इस बात से राहत व्यक्त की कि बच्चों को सुबह की प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझना नहीं पड़ा।

रबी फसलों पर पाला पड़ने का खतरा

घने कोहरे और लगातार बढ़ती ठंड ने किसानों के लिए चिंता का विषय पैदा कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति कुछ दिनों तक बनी रही, तो रबी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। खास तौर पर गेहूं, चना और विभिन्न सब्जियों की फसलों में पाले (फ्रॉस्ट) का खतरा बढ़ सकता है, जिससे उपज पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और प्रशासन की सलाह

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड और घने कोहरे की स्थिति बनी रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में, जिसमें आगर मालवा भी शामिल है, मध्यम से घना कोहरा जारी रह सकता है।

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि:

  • वाहन चालक विशेष सतर्कता बरतें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • फॉग लाइट्स का उपयोग करें तथा धीमी गति से वाहन चलाएं।
  • आमजन ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें, गरम पेय पदार्थ लें और आवश्यक सावधानियां अपनाएं।

यह मौसम की स्थिति उत्तर भारत के अन्य हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी सर्दी के चरम पर होने का संकेत दे रही है, जिसका असर जनजीवन, कृषि और परिवहन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

रबी फसलों पर ठंड के प्रभाव

आगर मालवा सहित मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में जनवरी 2026 की शुरुआत से कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और शीतलहर का प्रकोप जारी है। न्यूनतम तापमान कई जगहों पर 5-10 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जबकि कुछ जिलों में यह और भी कम हो रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में कोल्ड वेव और घने कोहरे की चेतावनी जारी की है, जिसका सीधा असर रबी फसलों पर पड़ सकता है।

प्रमुख रबी फसलों पर ठंड का प्रभाव

रबी सीजन की मुख्य फसलें जैसे गेहूं, चना, सरसों, मसूर और सब्जियां इस समय वृद्धि के महत्वपूर्ण चरण में हैं। ठंड का प्रभाव फसल के विकास चरण पर निर्भर करता है:

  • गेहूं — सामान्य से नीचे तापमान और ठंडी हवाएं गेहूं के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, क्योंकि यह ठंडे मौसम में बेहतर विकास करता है। हालांकि, यदि पाला (फ्रॉस्ट) पड़ता है, खासकर जॉइंटिंग या बूटिंग स्टेज में, तो स्पाइक्स क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिससे दाने कम बनते हैं और उपज में 10-20% तक की कमी आ सकती है।
  • चना और सरसों — ये फसलें फूल आने और फली बनने के चरण में अधिक संवेदनशील होती हैं। अत्यधिक ठंड या पाला पड़ने से फूल झड़ सकते हैं, पराग बंध्य हो सकता है, और फलियां/बीज प्रभावित हो सकते हैं। सरसों में फ्रॉस्ट से फली फटने या बीजों में नुकसान का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है।
  • सब्जियां (आलू, टमाटर आदि) — पाला से पत्तियां झुलस जाती हैं, फल छोटे रह जाते हैं या पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।

वर्तमान में IMD और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अभी तक बड़े पैमाने पर पाला की रिपोर्ट नहीं आई है, और अधिकांश रबी फसलें ग्रोइंग स्टेज में हैं। इसलिए फिलहाल बड़े नुकसान की आशंका कम है, लेकिन यदि स्थिति बनी रही और रातें और ठंडी हुईं, तो फ्रॉस्ट का खतरा बढ़ सकता है। उत्तर भारत और मध्य प्रदेश में अतिरिक्त कोल्ड वेव डेज की संभावना जताई गई है।

किसानों के लिए सावधानियां और बचाव के उपाय

कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपायों से फसलों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है:

  • हल्की सिंचाई — पाला की आशंका से एक दिन पहले शाम को हल्की सिंचाई करें। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और तापमान स्थिर रहता है, जिससे पाला का असर कम होता है।
  • फसलों को ढकना — छोटी फसलों, सब्जियों या नर्सरी को पारदर्शी प्लास्टिक शीट, टाट या बोरियों से रात में ढकें।
  • राख या अन्य सामग्री का छिड़काव — आलू जैसी फसलों में राख छिड़कने से पाला से बचाव होता है।
  • धुंआ या फॉगिंग — बड़े खेतों में धुंआ उत्पन्न करके हवा का तापमान बढ़ाया जा सकता है।
  • उन्नत किस्में — ठंड प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ठंड और कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। किसानों को सतर्क रहने और स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। यदि मौसम में सुधार होता है (जैसे पश्चिमी विक्षोभ से हल्की बारिश), तो फसलों को फायदा भी हो सकता है। कुल मिलाकर, वर्तमान ठंड रबी फसलों के लिए मिश्रित प्रभाव वाली है—अधिक ठंड फायदेमंद लेकिन अत्यधिक ठंड या पाला हानिकारक।

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News Desk

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