संवाददाता: जितेंद्र कुमार
अतुल्य भारत चेतना न्यूज़, जयपुर राजस्थान
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राजस्थान में चल रहे जल संरक्षण अभियान की देशभर में सराहना हो रही है। इस अभियान से राजस्थान अन्य प्रदेशों में रोल मॉडल बन गया है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के अन्तर्गत प्रदेश में हुए जल संरक्षण संरचनाओं को अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जाएगा। अभियान में अब तक प्रदेश के 7742 गांवों का चयन कर 2 लाख 28 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है जिसके अच्छे परिणाम सामने आए।
कर्मभूमि से मातृभूमि” अभियान (Karmabhoomi Se Matribhoomi Abhiyan) के तहत जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए राजस्थान प्रदेश पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन रहा है। यह अभियान विशेष रूप से वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु:
उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य गिरते भू-जल स्तर को रोकना और जल स्रोतों के स्थायित्व के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
जन भागीदारी: यह अभियान प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मातृभूमि से जोड़ते हुए जल संरक्षण कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है। इसमें भामाशाहों (दानदाताओं), कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), और क्राउड फंडिंग (Crowd Funding) के माध्यम से वित्तीय सहायता जुटाई जाती है।
उपलब्धियां: इस अभियान के तहत अब तक 14,500 से अधिक जल संरक्षण और रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है।
लक्ष्य : राज्य के 41 जिलों की 11,195 ग्राम पंचायतों में लगभग 45,000 जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रव्यापी प्रभाव: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने भी इस अभियान की सराहना की है और इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस प्रकार, जल संरक्षण के क्षेत्र में यह अनूठी पहल राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित इस अभियान को प्रदेश में जल संरक्षण और भूजल पूर्ण भरण की दिशा में मिल का पत्थर साबित हो रहा है।
प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के ‘ कैच द रेन ‘ अभियान से प्रेरित होकर राजस्थान में जल सहेजने की परम्परा को नई मजबूती मिली ।

