जयपुर। छात्रा अमायरा की दुखद मौत और शिक्षा विभाग में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं के बीच अब प्रदेशभर में विरोध तेज हो गया है। जयपुर में मंगलवार को जगह-जगह ‘शिक्षा मंत्री लापता’ के पोस्टर लगाए गए, जिसके बाद मामला और गर्मा गया है। ये पोस्टर परिवर्तन संस्था द्वारा चलाए जा रहे ‘Justice for Amaira’ आंदोलन का हिस्सा हैं।
इस अभियान को संयुक्त अभिभावक संघ ने भी पूर्ण समर्थन देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की चुप्पी को “असंवेदनशील” और “चिंताजनक” करार दिया है। संघ का कहना है कि प्रदेश में लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के शीर्ष नेतृत्व की निष्क्रियता अभिभावकों के गुस्से और भय को बढ़ा रही है।
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39 दिन बाद भी मंत्री का कोई हस्तक्षेप नहीं
अभिभावक संगठनों का कहना है कि:
शिक्षा मंत्री अभी तक अमायरा के घर नहीं गए,
न ही स्कूल परिसर पहुंचे,
न ही किसी प्रकार का सार्वजनिक बयान जारी किया।
नीरजा मोदी स्कूल की घटना को 39 दिन हो चुके हैं, लेकिन विभागीय जांच रिपोर्ट अब तक न तो सार्वजनिक हुई है और न ही पीड़ित परिवार से साझा की गई है। CBSE की तरह कार्रवाई करने का जो आश्वासन दिया गया था, वह भी अधूरा रह गया।
निजी स्कूलों पर कार्रवाई की मांग और बढ़ी
संयुक्त अभिभावक संघ ने आरोप लगाया कि अभी तक किसी भी निजी स्कूल में सुरक्षा मानकों को लेकर कठोर कार्रवाई घोषित नहीं की गई है। संघ का कहना है कि पिछले 39 दिनों में अमायरा सहित 5 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन विभाग का रवैया बेहद उदासीन है।
संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा:
> “जब विभाग का शीर्ष जिम्मेदार व्यक्ति ही बच्चों की सुरक्षा पर चुप बैठ जाए, तो अभिभावक न्याय की उम्मीद किससे करें?”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार निजी स्कूलों की लापरवाही पर अंकुश लगाने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा पा रही है।
परिवर्तन संस्था का पोस्टर अभियान चर्चा में
पूरे जयपुर में लगाए गए “शिक्षा मंत्री लापता” पोस्टरों में बड़ा प्रश्न उठाया गया है कि आखिर ऐसे गंभीर मामलों में मंत्री चुप क्यों हैं? पोस्टर शहर में तेजी से वायरल हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी विरोध की लहर दिख रही है।

