अतुल्य भारत चेतना | स्पेशल रिपोर्ट
नई दिल्ली। अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई ‘द फैमिली मैन’ सीरीज़ ने भारतीय ओटीटी स्पेस में एक नया मानक स्थापित कर दिया है। मनोज बाजपेयी की लीड रोल वाली यह स्पाई थ्रिलर अब अपने तीसरे सीज़न में पहुंच चुकी है, जो 21 नवंबर 2025 को रिलीज़ हुई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक काल्पनिक विंग थ्रेट एनालिसिस एंड सर्विलांस सेल (टीएएससी) के इंटेलिजेंस ऑफिसर श्रीकांत तिवारी की कहानी, जो एक आम मिडिल क्लास परिवार का पिता और पति भी है, दर्शकों को न सिर्फ एक्शन से बांधती है, बल्कि भावनात्मक गहराई से भी झकझोरती है। क्रिटिक्स और ऑडियंस दोनों की तारीफ बटोर चुकी यह सीरीज़ अब एक ग्लोबल फेनोमेना बन चुकी है, जहां जेम्स बॉन्ड स्टाइल की स्पाई जासूसी को देसी फ्लेवर के साथ परोसा गया है। अगर आपने अभी तक नहीं देखा, तो प्राइम मेंबर्शिप के साथ अभी शुरू करें – यह न सिर्फ एंटरटेनमेंट है, बल्कि आज के भारत की सच्ची तस्वीर भी।
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कहानी का सार: दोहरी जिंदगी की त्रासदी और ट्रायंफ
‘द फैमिली मैन’ राज एंड डीके (राज निदिमोरू और कृष्णा डीके) द्वारा क्रिएटेड है, जो 2019 में पहली बार रिलीज़ हुई। पूरी सीरीज़ श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) के इर्द-गिर्द घूमती है – एक ऐसा आदमी जो बाहर से एक बोरिंग मिडिल क्लास जॉब वाला पिता लगता है, लेकिन अंदर से देश को आतंकवाद से बचाने वाला वर्ल्ड-क्लास स्पाई है। उसकी पत्नी सुची (प्रियमानी) एक होममेकर हैं, जो परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं, जबकि बेटा अथर्व और बेटी धृति (गुल पनाग और अन्य) अपनी टीनएज जिंदगी जीते हैं। श्रीकांत की सीक्रेट लाइफ परिवार के लिए हमेशा एक बोझ बनी रहती है – झूठ, अनुपस्थिति और खतरे की छाया में प्यार टूटता-जोड़ता रहता है।
- सीज़न 1 (2019): श्रीकांत को ‘मिशन ज़ुल्फ़िकार’ नामक एक बड़े आतंकी प्लॉट का सामना करना पड़ता है, जो आईएसआई-बैक्ड ऑपरेटिव्स द्वारा भारत पर हमला करने का प्लान है। कश्मीर से लेकर दिल्ली तक फैले इस प्लॉट में श्रीकांत को न सिर्फ दुश्मनों से लड़ना पड़ता है, बल्कि अपनी बेटी धृति की रेडिकलाइजेशन की आशंका से भी जूझना पड़ता है। यह सीज़न आतंकवाद की जड़ों – रेडिकलाइजेशन, इस्लामोफोबिया और हिंदुत्व एक्सट्रीमिज्म – को बिना प्रचार के दिखाता है। अंत में, श्रीकांत प्लान को फॉइल कर देता है, लेकिन परिवारिक दरारें गहरी हो जाती हैं।
- सीज़न 2 (2021): श्रीकांत टीएएससी छोड़कर प्राइवेट सेक्टर में चला जाता है, ताकि परिवार के साथ समय बिता सके। लेकिन एक पुराने दुश्मन और एलटीटीई-इंस्पायर्ड ग्रुप की साजिश उसे वापस खींच लेती है। यहां साउथ इंडियन एक्ट्रेस समंथा रुथ प्रभु का रोल राजी के रूप में कमाल का है – एक ऐसी मिलिटेंट जो अपनी आजादी के लिए कुछ भी करने को तैयार है। प्लॉट में प्राइम मिनिस्टर पर अटैक का एंगल है, और श्रीकांत की पत्नी सुची के अफेयर की थ्रेड फैमिली ड्रामा को और इंटेंस बनाती है।
- सीज़न 3 (2025): हाल ही में रिलीज़, यह सीज़न इंडो-म्यांमार बॉर्डर पर फोकस करता है। श्रीकांत एक पर्सनल मिशन पर है – एक हत्या का बदला लेने के लिए – जो ‘प्रोजेक्ट सहकार’ नामक एक डेवियस कॉन्सपिरेसी को उजागर करता है। चीन के ‘प्रोजेक्ट गुआन यू’ के जवाब में भारत के ‘फीनिक्स विलेजेस’ प्लान को टारगेट करते हुए, यह सीज़न नॉर्थ-ईस्ट के कॉन्फ्लिक्ट्स, मोल्स, बैट्रेयल और फैमिली को खतरे में डालते हुए एक वॉर-लाइक सिचुएशन बनाता है। नए एंटागोनिस्ट्स जयदीप अहलावत और निमरत कौर (रुकमा के रोल में) सीरीज़ को नया टर्न देते हैं, जबकि ज़ोया (शरीब हाशमी) और यतिश जैसे सपोर्टिंग कैरेक्टर्स की केमिस्ट्री कमाल की है। अंत क्लिफहैंगर पर होता है, जो सीज़न 4 की गुंजाइश छोड़ता है।
कहानी रियल न्यूज़ क्लिपिंग्स और इंसिडेंट्स से इंस्पायर्ड है, जो इसे ऑथेंटिक बनाती है। लेकिन कोर थीम है बैलेंस – स्पाई की सुपरह्यूमन स्किल्स बनाम पर्सनल फेल्यर्स, जहां श्रीकांत का ‘ट्रू लाइज़’ स्टाइल लाइफ फैमिली को धोखा देता रहता है।
क्यों है यह खास? एक नई उम्र की स्पाई थ्रिलर
‘द फैमिली मैन’ खास इसलिए है क्योंकि यह हॉलीवुड की ‘जैक रायन’ या ‘बोरने आइडेंटिटी’ को भारतीय मिडिल क्लास लेंस से देखती है। यहां हीरो के पास न ऐस्टन मार्टिन है, न गैजेट्स का ढेर – बस एक पुरानी हैचबैक कार, चाय की चुस्की और देसी जुगाड़। यह सीरीज़ पॉलिटिकली अवेयर है: सीज़न 1 में गौ-रक्षक स्क्वॉड्स के टेरर को हाइलाइट किया गया, सीज़न 2 में तमिलनाडु की पॉलिटिक्स और एलटीटीई को, जबकि सीज़न 3 नॉर्थ-ईस्ट की आइडेंटिटी स्ट्रगल को छूता है। यह टेररिस्ट्स को ‘इनोसेंट’ नहीं दिखाती, बल्कि उनकी बैकस्टोरी से सिम्पैथी जगाती है – जैसे सीज़न 1 का मोसा (नीरज माधव), जो पूर्व आईएसआईएस रिक्रूट है।

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ह्यूमर का टच – श्रीकांत की फैमिली डिनर टेबल पर विटिसिज्म – इसे रिलेटेबल बनाता है। अमेज़न की बेस्ट इंडियन ओरिजिनल्स में से एक, यह सीरीज़ रॉटेन टोमेटोज़ पर 90%+ स्कोर के साथ स्टैंड करती है। विवाद भी हुए – तमिलनाडु गवर्नमेंट ने सीज़न 2 पर बैन की मांग की, और कुछ ने इसे ‘प्रो-टेरर’ कहा – लेकिन यही इसे रियल बनाता है। मनोज बाजपेयी का परफॉर्मेंस? अनमैच्ड! वह एक साथ हीरो, लवर, फादर और विलेन जैसा लगता है।
विस्तृत समीक्षा: स्ट्रेंग्थ्स, वीकनेसेस और ओवरऑल वर्डिक्ट
प्लॉट एंड राइटिंग (8.5/10): राज एंड डीके की राइटिंग कम्पेलिंग है – ट्विस्ट्स अनप्रेडिक्टेबल, डायलॉग्स स्नैपी। सीज़न 1 और 2 में टाइटनेस कमाल की, लेकिन सीज़न 3 थोड़ा स्ट्रेच्ड लगता है। एक्शन सीक्वेंसेज (जैसे सिंगल-टेक फाइट्स) ब्रेथटेकिंग हैं, लेकिन कुछ ड्यू एक्स माचिना मोमेंट्स (अचानक सॉल्यूशन) आर्टिफिशियल फील देते हैं। फैमिली आर्क इमोशनली रिच है – सुची का स्ट्रगल रियल वुमनहुड दिखाता है।
परफॉर्मेंस (9.5/10): मनोज बाजपेयी जन्म से श्रीकांत के लिए बने हैं – उनका कॉमिक टाइमिंग और इंटेंसिटी परफेक्ट। प्रियमानी की सुची हार्टब्रेकिंग है, शरीब हाशमी का जेकेपी ह्यूमर का इंजेक्शन। सीज़न 2 में समंथा का राजी आइकॉनिक, और सीज़न 3 में जयदीप अहलावत का एंटागोनिस्ट चिलिंग। सपोर्टिंग कास्ट – गुल पनाग, वेदांत चतुर्वेदी – सब शाइन करते हैं।
टेक्निकल एस्पेक्ट्स (8/10): सिनेमेटोग्राफी (फ्रांसिस-मैरी जॉन) और एडिटिंग (सुमीत कोटियन) टॉप-नॉच, खासकर नॉर्थ-ईस्ट के लोकेशन्स। बैकग्राउंड स्कोर (कृष्णा कुमार) टेंशन बिल्ड करता है। लेकिन वीएफएक्स (विजुअल इफेक्ट्स) में बजट की कमी दिखती है – एक्शन में कुछ सस्ता लगता है।
वीकनेसेस: पेसिंग कभी अनईवन – शुरुआत स्लो, क्लाइमेक्स रश्ड। कुछ क्रिटिक्स कहते हैं कि यह सोशल इश्यूज को हैंडल करने में क्लिशे हो जाती है, जैसे कश्मीर या नॉर्थ-ईस्ट को ‘सेंसिटिव’ दिखाना। सीज़न 3 का एंडिंग इनकम्पलीट लगता है, जो फ्रस्ट्रेटिंग है।
ओवरऑल रेटिंग: 9/10। अगर आप थ्रिलर लवर हैं, तो यह मास्टरपीस है। फैमिली ड्रामा के साथ पेट्रियॉटिज्म का ब्लेंड रेयर है। सीज़न 3 थोड़ा डिप इन फॉर्म है, लेकिन मनोज की वजह से वर्थ वॉच। रॉटेन टोमेटोज़ पर 92% क्रिटिक स्कोर और 95% ऑडियंस अप्रूवल – यह जस्टिफाइड है।
निष्कर्ष: देखिए, क्योंकि यह सिर्फ शो नहीं, एक मूवमेंट है
‘द फैमिली मैन’ साबित करती है कि भारतीय स्टोरीटेलिंग ग्लोबल हो सकती है – बिना बॉलीवुड मसाले के। यह उन अनसंग हीरोज़ को सलाम है जो देश बचाते हैं, लेकिन घर हार जाते हैं। अमेज़न प्राइम पर उपलब्ध, यह सीरीज़ न सिर्फ बिंज-वर्थी है, बल्कि सोचने पर मजबूर करने वाली भी। अगर सीज़न 4 आया, तो तैयार रहिए – श्रीकांत की जंग अभी खत्म नहीं हुई। क्या आपने देखा? कमेंट्स में बताएं!

