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Chhattisgarh news; आंवला नवमी पर रानी मंदिर देवस्थानम में आंवला पूजन एवं सहभोज संपन्न

अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप

जुना/रतनपुर। ऐतिहासिक नगरी रतनपुर के जुना शहर मोहल्ले में स्थित प्राचीन रानी मंदिर देवस्थानम में आंवला नवमी के पावन अवसर पर आंवला पूजन का कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। पूजन के पश्चात् सभी भक्तजनों को भोजन प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर परिसर में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में आसपास के ग्रामीण जन एवं जुना शहर के निवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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रानी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

रानी मंदिर रतनपुर की प्राचीन धरोहरों में से एक है। यह मंदिर बारहवीं शताब्दी में निर्मित रानी तालाब के किनारे स्थित है, जिसे तत्कालीन रतनपुर नरेश ने अपनी रानी के लिए खुदवाया था। तालाब के पार स्थित यह मंदिर उस काल की भव्यता का साक्षी है। यहीं पास में रानी महल, राजा महल एवं बादल महल स्थित हैं। दूसरी ओर खो-खो बावली है, जहां रानियां अपनी सहेलियों के साथ खो-खो खेला करती थीं। पुरातन काल में रतनपुर राज्य का मुख्य नगर यही था, इसी कारण इसे जुना शहर के नाम से जाना जाता है। यह क्षेत्र आज भी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए विख्यात है।

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मंदिर का जीर्णोद्धार एवं निरंतर धार्मिक आयोजन

लगभग 12-15 वर्ष पूर्व यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। समाजसेवी एवं अधिवक्ता राकेश निर्मलकर ने जुना शहर के कुछ जागरूक नागरिकों के सहयोग से इसका भव्य जीर्णोद्धार कराया। तब से मंदिर पुनः जीवंत हो उठा है। दोनों नवरात्रों में यहां ज्योति कलश प्रज्वलन एवं नवरात्र उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष भर विभिन्न ध्‍ार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं, जिनमें आंवला नवमी पूजन एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

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आंवला नवमी पूजन एवं सहभोज

आंवला नवमी कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि आंवला को आयुर्वेद में औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है तथा इसे दीर्घायु एवं स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। रानी मंदिर में सुबह से ही भक्तजन एकत्रित होने लगे। मंदिर व्यवस्थापक राकेश निर्मलकर के नेतृत्व में विधि-विधान से आंवला पूजन संपन्न हुआ। पूजन में आंवले के वृक्ष के नीचे कलश स्थापना, षोडशोपचार पूजन, हवन एवं आरती की गई। पूजन के उपरांत सभी उपस्थित भक्तजनों को भोजन प्रसाद वितरित किया गया। सहभोज में सात्विक भोजन परोसा गया, जिसमें खिचड़ी, कढ़ी, सब्जी, रोटी एवं आंवले का अचार प्रमुख थे। भोजन ग्रहण के बाद सामूहिक आरती हुई और कार्यक्रम का शुभ समापन हुआ।

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आयोजक एवं सहभागी

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं रानी मंदिर के व्यवस्थापक राकेश निर्मलकर रहे, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया। उनके साथ जुना शहर मोहल्ले के निवासी, आसपास के ग्रामीण एवं मंदिर समिति के सदस्य सक्रिय रहे। महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया।

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सामाजिक संदेश

श्री राकेश निर्मलकर ने कहा, “रानी मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत बनाते हैं।” भक्तजनों ने भी मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं निरंतर रखरखाव के लिए श्री निर्मलकर एवं समिति का आभार व्यक्त किया।

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News Desk

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