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Sun. Jan 11th, 2026

प्रसिद्ध साहित्यकार प्रबुद्ध सौरभ का लेख; …लेकिन विडम्बना पता है क्या है?

उनका सब कुछ मैनेज हो जाएगा
आपका कुछ भी मैनेज नहीं होगा।
आपसे रिश्वत लेने वाला
अगर पकड़ा भी गया
तो ज़मानत पर छूट जाएगा।
आपको अपनी नगदी छुड़ाने के लिए
उससे अधिक बार
चक्कर काटने पड़ेंगे, थाने के।
उसे एक बार सज़ा मिलेगी।
आपको सौ बार सुनाया जाएगा
कि रिश्वत देना भी अपराध है।
वो तो हम केस फाइल नहीं कर रहे
वरना आप जेल में होते।
आप इसे उसकी कृपा मान कर
धन्यवाद बोलेंगे।
थाना बोलेगा,
धन्यवाद की क्या ज़रुरत है,
ज़रुरत तो कैश की पड़ती है बाज़ार में।
और आप देंगे,
थाना आपकी नगदी ले लेगा।
थाने का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।
ये हर जगह होगा।

आपका कोई बीमार पड़ेगा,
अस्पताल आपकी जमा-पूँजी ले लेगा।
अस्पताल का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।

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आपका बच्चा पढ़ने जाएगा,
स्कूल आपकी चौथाई तनख्वाह ले लेगा।
स्कूल का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।

आप किसी ऑनलाइन फ़्रॉड में फंसेंगे,
अपराधी आपका बैंक बैलेंस ले लेगा।
अपराधी का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।

आप वोटर बनेंगे, सियासत लालच से ले कर धमकी तक सबका उपयोग करेगी।
सियासत आपका वोट ले लेगी।
सियासत का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।

स्पॉन्सर्ड लोग दंगा करेंगे,
दंगाई आपके घर का चिराग़ ले जाएगा।
दंगाई का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।

आपके आस-पास किसी लड़की के साथ दरिंदगी हो जाएगा,
बलात्कारी लड़की की ज़िन्दगी ले लेगा।
बलात्कारी का सब कुछ मैनेज हो जाएगा।

सबका सब कुछ मैनेज हो जाएगा,
आपका कुछ भी मैनेज नहीं होगा –
न नगदी, न जमा-पूँजी, न तनख्वाह, न बैंक बैलेंस, न वोट, न ज़िन्दगी।
इसलिए, कि आपके कपड़े सफ़ेद हैं
और सफ़ेद में कुछ भी मैनेज नहीं हो सकता।

लेकिन विडम्बना पता है क्या है?
इन जगहों पर, टेबल की दूसरी तरफ़ जो इंसान बैठा है,
वो भी सफ़ेद कपड़े वाला ही है,
टेबल के इस तरफ़ बैठे मेरी तरह, आपकी तरह।
यानि हम बहुत सारी सफ़ेद इकाइयों ने मिल कर
एक बड़ी, काली इकाई बनायी है
जिसे हम सिस्टम कहते हैं।
और कमाल देखिए
कि इकाइयों के ही बनाए सिस्टम का सब कुछ मैनेज हो जाता है,
इकाइयों का कुछ भी मैनेज नहीं होता।

-प्रबुद्ध सौरभ
(साहित्यकार, गीतकार एवं फिल्म पटकथा लेखक)

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News Desk

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