अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी
कैराना। नगर पालिका परिषद कैराना के कुछ कर्मचारियों पर एक परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए तहसील दिवस में न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का दावा है कि कर्मचारी घर के सामने जबरन सड़क निर्माण कर रहे हैं और विरोध करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने, महिलाओं-बच्चों को धमकाने और जान-माल का खतरा पैदा करने की साजिश रच रहे हैं। पीड़ित इरशाद (पुत्र जाहीर, निवासी मोहल्ला आलकलां हरिजन मंदिर के पीछे, वार्ड-9) ने उच्चाधिकारियों से लेकर उच्च न्यायालय तक शिकायत की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। परिवार ने तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि दबंगई का यह सिलसिला रुके।
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परिवार का आरोप: जबरन सड़क निर्माण और धमकियों का सिलसिला
पीड़ित इरशाद ने बताया कि नगर पालिका में तैनात कुछ कर्मचारी दबंगई दिखाते हुए उसके मकान के ठीक सामने सड़क निर्माण जबरन कराना चाहते हैं। यह निर्माण न केवल अवैध है, बल्कि परिवार की निजता और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। इरशाद ने कहा, “मैंने विरोध किया तो कर्मचारी अपने साथियों के साथ आए और झगड़ा करने लगे। धमकी दी कि अगर रास्ता नहीं निकालने दोगे, तो झूठे मुकदमे में फंसा देंगे।”
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आरोपों की समयरेखा निम्नानुसार है:
- 27 अगस्त 2024: इरशाद ने पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- 12 सितंबर 2024: नगर पालिका कर्मी के इशारे पर इरशाद के खिलाफ कैराना कोतवाली में फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया।
- वर्तमान: कर्मी और उनके सहयोगी लगातार फोन और व्यक्तिगत रूप से धमकियां दे रहे हैं कि “समझौता कर लो, वरना पूरे परिवार को जेल भेज देंगे।” परिवार की महिलाओं और बच्चों को भी परेशान किया जा रहा है।
इरशाद ने आशंका जताई कि कर्मचारी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा, “महिलाएं घर से बाहर निकलने में डर रही हैं, बच्चे स्कूल जाने से घबरा रहे हैं। जान-माल का खतरा है।”
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तहसील दिवस में गुहार: प्रार्थना पत्र के साथ सबूत पेश
तहसील दिवस पर इरशाद ने एसडीएम कैराना निधि भारद्वाज को प्रार्थना पत्र सौंपा। पत्र में सभी आरोपों का विस्तृत उल्लेख किया गया, साथ ही पहले की शिकायतों की प्रतियां, फर्जी मुकदमे की कॉपी और धमकियों के ऑडियो/मैसेज (यदि उपलब्ध) संलग्न किए गए। इरशाद ने मांग की:
- नगर पालिका कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।
- जबरन निर्माण कार्य रोका जाए।
- परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
- फर्जी मुकदमे की जांच कर रद्द किया जाए।
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एसडीएम ने प्रार्थना पत्र प्राप्त कर संबंधित विभागों को जांच के निर्देश दिए। एक अधिकारी ने बताया, “मामला गंभीर है। पालिका और पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है।”
शिकायतों का दौर: उच्च न्यायालय तक पहुंची फरियाद
इरशाद ने पहले ही मामले को उच्च स्तर पर उठाया है:
- पालिका स्तर: अध्यक्ष और ईओ को शिकायत (कोई कार्रवाई नहीं)।
- जिला स्तर: जिलाधिकारी और एसपी को पत्र।
- उच्च न्यायालय: रिट याचिका दायर, जहां सुनवाई लंबित है।
परिवार का कहना है कि पालिका कर्मियों की पुलिस और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से सांठगांठ के कारण कार्रवाई नहीं हो रही। एक पड़ोसी ने गुमनाम रहते हुए कहा, “यह दबंगई आम हो गई है। गरीब परिवार डर के मारे चुप रहता है।”
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प्रभाव और मांग: दबंगई पर अंकुश की जरूरत
यह मामला नगर पालिका कर्मियों की मनमानी और आमजन पर दबाव की बढ़ती घटनाओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और निलंबन जरूरी है, ताकि विश्वास बना रहे। परिवार ने मीडिया से भी अपील की है कि उनकी आवाज बुलंद की जाए।
