हजारों कृष्णभक्तो का तीर्थराज विमलकुण्ड कामवन धाम पर सैलाब
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
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ग्यारह दिवसीय ब्रज चौरासी कोस यात्रा
डीग – डीग जिले के कस्बा कामां कामवन धाम में ब्रज यात्रा समिति पचोर जिला राजगढ़ मध्यप्रदेश क़े सानिध्य में ग्यारह दिवसीय ब्रज चौरासी कोस यात्रा कर हजारों कृष्ण भक्तों का तीर्थराज विमलकुण्ड पर आगमन हुआ । सभी तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित मुख्य मन्दिर विमल बिहारी के दर्शन व पूजन कर तीर्थराज क़े आचमन व परिक्रमा कर कदमखंडी को रवाना हुए।
मन्दिर विमल बिहारी जी दर्शन को आये भक्तों को मुख्य मंदिर विमल बिहारी जी के सेवायत संजय लवानिया ने यात्रा में शामिल सभी भक्तों को विमलकुण्ड और विमल बिहारी मंदिर का आध्यात्मिक माहात्म्य सुनाते हुए कहा कि
विमल बिहारी व विमलकुण्ड क़े दर्शन मात्र से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं ऐसा अनेकों पुराणों में वर्णन है।
भगवान श्रीकृष्ण 9 वर्ष 49 दिन नंदगाँव में रहे थे, जहाँ उन्होंने पूतना वध, कालिया दमन और गोवर्धन पर्वत उठाने जैसी कई बाल लीलाएँ कीं, और बाद में कंस के अत्याचारों से बचने के लिए गोकुल से नंदगाँव चले आए थे। उन्होंने नंदगाँव में करीब नौ साल बिताए और फिर मथुरा के लिए प्रस्थान किया। श्रीकृष्ण प्रतिदिन गोचारण क़े लिये कामवन आते थे जहां उन्होंने अनेकों लीलाएं कीं जिनके जीवंत चिन्ह आज भी कामवन में विद्यमान है जिनके दर्शन कर भक्तजन अनंत आनन्द का अनुभव करते हैं।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पुरुषोत्तम भगवान् कृष्ण को केवल प्रेम के बन्धन द्वारा ही बांधा जा सकता है I इस भूमि का कण-कण राधा-कृष्ण की पावन लीलाओं का साक्षी है। यही कारण है कि समूचे ब्रज मण्डल का दर्शन व उसकी पूजा करने के उद्देश्य से देश-विदेश से असंख्य तीर्थ यात्री यहां वर्ष भर आते रहते हैं।
ब्रज का हर वृक्ष देव हैं, हर लता देवांगना है, यहाँ की बोली में माधुर्य है, बातों में लालित्य है, पुराणों का सा उपदेश है, यहाँ की गति ही नृत्य है, रति को भी यह स्थान त्याग करने में क्षति है, कण-कण में राधा-कृष्ण की छवि है, दिशाओं में भगवद नाम की झलक, प्रतिपल कानों में राधे-राधे की झलक, देवलोक-गोलोक भी इसके समक्ष नतमस्तक हैं। सम्पूर्ण ब्रज-मण्डल का प्रत्येक रज-कण, वृक्ष, पर्वत, पावन कुण्ड-सरोवर और श्री यमुनाजी श्रीप्रिया-प्रियतम की नित्य निकुंज लीलाओं के साक्षी हैं। श्री कृष्ण जी ने अपने ब्रह्मत्व का त्याग कर सभी ग्वाल बालों और ब्रज गोपियों के साथ अनेक लीलाएँ की हैं। यहाँ उन्होने अपना बचपन बिताया। जिसमें उन्होने ग्वाल बालों के साथ क्रीड़ा, गौ चारण, माखन चोरी, कालिया दमन आदि अनेक लीलाएँ की हैं। भगवान कृष्ण की इन लीलाओं पर ही ब्रज के नगर, गाँव, कुण्ड, घाट आदि स्थलों का नामकरण हुआ है। ब्रजयात्रियों ने श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों गया कुण्ड ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,खिसलनी शिला ,भामासुर की गुफा ,महाप्रभु जी की बैठक ,चौरासीखम्भा ,आदि के दर्शन किये तथा कदमखंडी होते हुए वृन्दावन को रवाना हो गये।

