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नरसिंहपुर के शासकीय माध्यमिक स्कूल में लापरवाही: शिक्षकों की अनुपस्थिति और स्वच्छता की कमी से छात्रों का भविष्य खतरे में

अतुल्य भारत चेतना (धर्मेंद्र साहू)

नरसिंहपुर। जिले के करेली ब्लॉक में स्थित शासकीय माध्यमिक शाला, मिढ़ली (जन शिक्षा केंद्र) में शैक्षणिक व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। एक स्थानीय जांच और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर, स्कूल में केवल दो शिक्षक और एक प्रिंसिपल कार्यरत हैं, जो कक्षा छठवीं से आठवीं तक के छात्रों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि शिक्षक कक्षा के दौरान मोबाइल फोन पर व्यस्त रहते हैं, छात्रों से पानी भरवाने जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य करवाते हैं, और पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। इस स्थिति से छात्रों का शैक्षणिक समय बर्बाद हो रहा है, साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

स्कूल की वर्तमान स्थिति और निरीक्षण के निष्कर्ष

स्कूल में स्टाफ की कमी एक प्रमुख समस्या है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल दो शिक्षक और प्रिंसिपल श्री रघुवीर प्रसाद साहू ही उपलब्ध हैं, जो कक्षा सातवीं और आठवीं के छात्रों को पढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। निरीक्षण के दौरान प्रिंसिपल को घर पर ड्यूटी निभाते पाया गया, जबकि स्कूल में उनकी उपस्थिति अनिवार्य है। इससे शिक्षण कार्य पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

इसके अलावा, स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी उजागर हुई है:

  • पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण छात्रों को खुद पानी भरना पड़ता है। इससे उनका पढ़ाई का समय व्यर्थ होता है।
  • स्कूल परिसर में गंदा पानी जमा है, जो स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है, जैसे मच्छरों का प्रजनन और संक्रामक रोगों का खतरा।
  • शिक्षकों की लापरवाही के प्रमाण के रूप में स्थानीय निवासियों ने वीडियो रिकॉर्डिंग की है, जिसमें शिक्षक मोबाइल पर व्यस्त दिखाई दे रहे हैं और छात्रों से अनुचित कार्य करवाते हुए कैद हुए हैं।

स्थानीय समुदाय का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी सरकारी स्कूलों में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, और ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। हालांकि, स्कूल प्रशासन या शिक्षकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे मामले की जांच की मांग और तेज हो गई है।

अनुशंसित कार्रवाई और प्रशासनिक जिम्मेदारी

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इस मामले पर तत्काल ध्यान दिया जाए। मुख्य अनुशंसाएं इस प्रकार हैं:

  • प्रिंसिपल श्री रघुवीर प्रसाद साहू और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।
  • स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चल सके।
  • पानी की उचित व्यवस्था और परिसर की स्वच्छता में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती रजनी सिंह, करेली ब्लॉक के शिक्षा अधिकारी श्री प्रातुल इंदुरय्व्या, और जनपद पंचायत के सीईओ श्री गजेन्द्र सिंह को रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। इन अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे मामले की जांच करें और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करें। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह सरकारी शिक्षा प्रणाली में व्याप्त व्यापक समस्याओं को उजागर करेगा, जैसे स्टाफ की कमी और संसाधनों का अभाव।

व्यापक संदर्भ और दृष्टिकोण

मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की स्थिति अक्सर चर्चा का विषय रही है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात आदर्श से कम है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होती है। हालांकि, इस विशिष्ट मामले में आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच आवश्यक है। स्थानीय निवासियों की शिकायतें वैध प्रतीत होती हैं, लेकिन शिक्षकों की ओर से कोई स्पष्टीकरण न होने से मामला एकपक्षीय लग रहा है। यदि जांच में लापरवाही सिद्ध होती है, तो यह शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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News Desk

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