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इंदौर दूषित जल संकट: कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, इस्तीफे की मांग

अतुल्य भारत चेतना (मनोज विजयवर्गीय)

शाजापुर (मध्य प्रदेश): इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने से हुई मौतों के मामले में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य सरकार को ‘जानलेवा’ करार देते हुए आरोप लगाया कि यह जनता की सुरक्षा की चिंता नहीं करती और भाई-भतीजावाद तथा भ्रष्टाचार में लिप्त है। चौधरी ने इंदौर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शुद्ध पानी उपलब्ध न करा पाने के लिए जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

चौधरी सोमवार को शाजापुर जिले के पोलायकलां पहुंचे थे, जहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने इंदौर संकट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवेज का पानी पीने योग्य जल में मिलने से कई लोगों की मौत हुई है। चौधरी ने अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफा, महापौर पर एफआईआर और मुख्यमंत्री मोहन यादव से जवाब मांगने की अपील की।

बाइट: कुणाल चौधरी, पूर्व विधायक व राष्ट्रीय सचिव, कांग्रेस “मध्य प्रदेश में ‘जानलेवा सरकार’ चल रही है, जिसे जनता की बिल्कुल चिंता नहीं है। सरकार केवल ‘भाई-भतीजावाद, भूख और भ्रष्टाचार’ में लिप्त है। इंदौर की ‘ट्रिपल इंजन’ और ‘पांचवें इंजन’ वाली सरकार जनता को शुद्ध पानी भी नहीं पिला पा रही है। गंदा पानी पिलाकर लोगों की हत्या की जा रही है।”

इंदौर में दूषित जल संकट की पृष्ठभूमि: प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का पानी पीने की लाइन में मिल गया, जिससे डायरिया का प्रकोप फैला। लैब रिपोर्ट में बैक्टीरियल कंटामिनेशन की पुष्टि हुई है। आधिकारिक आंकड़ों में अब तक 6 मौतें दर्ज हैं, जबकि कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स और विपक्षी दावों में यह संख्या 10 से 16 तक बताई जा रही है। सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हैं और कई ठीक होकर डिस्चार्ज भी हो चुके हैं।

सरकार की ओर से कार्रवाई: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की और स्थिति की समीक्षा की। नगर निगम आयुक्त को हटाया गया, दो अन्य अधिकारियों को निलंबित किया गया और जांच समिति गठित की गई है। प्रभावित परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता और मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। टैंकरों से स्वच्छ पानी की आपूर्ति और पाइपलाइन की सफाई का काम जारी है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और पूर्ण जांच का आश्वासन दिया है।

विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष ने इसे बुनियादी ढांचे की पुरानी समस्या बताते हुए त्वरित राहत कार्यों पर जोर दिया है। मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी रिपोर्ट तलब की है और हाईकोर्ट ने स्वच्छ जल आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन जांच जारी है।

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News Desk

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