*सिरमौर कांग्रेस में चुनावी भूचाल—11 दावेदार मैदान में, पांवटा से तिकड़ी की एंट्री; शिलाई–रेणुकाजी खामोश*
जिला सिरमौर कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर तूफ़ानी हलचल शुरू हो चुकी है।
अध्यक्ष की कुर्सी इस बार पहले से कहीं ज्यादा गरम है, और कुल 11 नेताओं ने दावेदारी ठोककर सियासत को खौलते पानी में बदल दिया है।
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पांवटा साहिब इस बार पूरी ताकत में दिखा—
किरनेश जंग, *मनीष तोमर* और अवनीत लांबा ने खुलकर मैदान में उतरकर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।
उधर नाहन से तीन और पच्छाद से चार दावेदारों ने बाज़ी पलटने की कोशिश की और डीएवी की गुत्थी में अपनी एंट्री दर्ज कराई है।
लेकिन सबको चौंकाते हुए, शिलाई और श्री रेणुकाजी से एक भी नाम सामने नहीं आया—जो इन दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस की गिरती पकड़ की ओर इशारा कर रहा है।
हर्षवर्धन चौहान खेमे पर नजरें—लेकिन ‘गलत चयन’ का डर कांग्रेस को डरा रहा
पार्टी के अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक, इस बार कांग्रेस ऐसा चेहरा ढूंढ रही है,
जो भरसक मेहनत करे, ज़मीन पर उतरे और संगठन को फिर से खड़ा करे।चर्चा है कि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के करीबी इस रेस में आगे माने जा रहे हैं—
लेकिन ज़मीनी कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि
यदि अध्यक्ष चयन सिर्फ गुटबाज़ी के आधार पर हुआ, तो कांग्रेस एक और बड़े राजनीतिक पतन की ओर बढ़ सकती है।
जिला सिरमौर में पार्टी की हालत पहले ही नाजुक है।
पांवटा और शिलाई वे दो क्षेत्र हैं जहाँ कांग्रेस लगातार पीछे खिसक रही है, और नेतृत्व की कमजोरी खुलकर सामने आ रही है।
पहाड़ी बनाम मैदानी—अध्यक्ष की कुर्सी पर सबसे बड़ी सियासी लड़ाई
इस बार मुकाबला सिर्फ नेताओं का नहीं,
बल्कि पहाड़ी बनाम मैदानी क्षेत्रों के प्रभाव का भी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का साफ कहना है—
> “यदि कांग्रेस ने अध्यक्ष पद पहाड़ी क्षेत्र को दिया, तो पार्टी का ढांचा फिर मजबूत हो सकता है।
लेकिन यदि मैदानी इलाकों के दबाव में फैसला हुआ, तो कांग्रेस सिरमौर में और टूट सकती है।”
यह चुनाव सिर्फ अध्यक्ष का नहीं,
बल्कि सिरमौर में कांग्रेस के भविष्य का निर्णय माना जा रहा है।
अब कांग्रेस किसे चुनेगी? मेहनत करने वाला चेहरा, या फिर गुटों को खुश करने वाला नेता?
जवाब जल्द ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है—
जिला कांग्रेस की यह जंग सिरमौर की सियासत का सबसे बड़ा थ्रिलर बन चुकी है।

