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बहराइच के ईको अवेयरनेस सेंटर में सम्पन्न हुई हाथी मानव संघर्ष प्रबन्धन कार्यशाला

 बहराइच के ईको अवेयरनेस सेंटर में सम्पन्न हुई हाथी मानव संघर्ष प्रबन्धन कार्यशाला

सूरज कुमार तिवारी 

संवाददाता बहराइच 

7318027005

 

बहराइच 03 दिसम्बर दिन बुधवार कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग एवं डब्लूडब्लूएफ के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को कतर्नियाघाट रेंज के ईको अवेयरनेस सेंटर में आयोजित हाथी मानव संघर्ष प्रबन्धन कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए डीएफओ कतर्नियाघाट सूरज ने कार्यक्रम में उपस्थित वन, पुलिस, कृषि विज्ञान, सिंचाई, विद्युत, पशुपालन, राजस्व व अन्य विभागों के प्रतिनिधियों का आहवान किया कि हाथी संरक्षण में सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी ग्रामवासियों को प्रदान करें जिससे उनके जीवन स्तर में बदलाव आये। डीएफओ ने कृषकों को सुझाव दिया कि फसलों में बदलाव करके हाथियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। 

डीएफओ द्वारा कृषकों को सुझाव दिया गया कि हल्दी उत्पादन के साथ साथ मधुमक्खी पालन एवं मशरूम उत्पादन से भी कृषक अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें इको विकास समितियों एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जायेगा। उन्होंने बताया कि थारू बाहुल्य ग्राम बर्दिया की महिलाओं द्वारा तैयार किये गये हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री हेतु कतर्नियाघाट पर्यटन केन्द्र में स्टाल आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास विभाग से समन्वय कर क्षेत्र की अन्य इच्छुक महिलाओं को प्रशिक्षण एवं हस्तशिल्प उत्पादन में सहयोग प्रदान किया जायेगा ताकि महिलाएं स्वावलम्बी बन सकें। 

बैराज पर जलीय जीवों की निगरानी तथा रेस्क्यू में सहयोग देने तथा वन क्षेत्र के समीप गांवों में मवेशियों के टीकाकरण तथा पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम में सहयोग देने हेतु सिंचाई एवं पशुपालन विभाग द्वारा दिये जा रहे सहयोग की सराहना करते हुए युुवाओं को पशुपालन व्यवसाय से जोड़ने की अपेक्षा की। विद्युत विभाग से अपेक्षा की गई कि वन क्षेत्रों तथा हाथी कारीडोर क्षेत्र में ढीले तारों दुरूस्त करा दिया जाये ताकि जंगली हाथियों को विद्युत तारों के कारण होने वाली घटना की संभावना को नगण्य किया जा सके। ग्राम प्रधानों का आहवान किया गया कि पर्यावरणीय गतिविधियों और मानव वन्यजीव संघर्ष कम करने वाले गतिविधियों को कार्ययोजना में शामिल करें। डीएमओ ने मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में सहयोग के लिए पुलिस व ग्राम प्रधानों की सराहना की तथा गज़मित्रों को सहयोग देने हेतु डब्लूडब्लूएफ व न्यूज़ संस्था के प्रयासों को सराहा। 

कार्यशाला में डब्लूडब्लूएफ की आस्था वर्मा द्वारा हल्दी की उन्नति खेती के बारे में प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया गया। जबकि डब्लूडब्लूएफ के नासित अली ने हाथियों के डीएनए प्रोफाइलिंग और वनस्पति सर्वेक्षण, कृषि विज्ञान केंद्र नानपारा के अध्यक्ष डॉ संदीप कुमार द्वारा आय में वृद्धि करने वाली तथा वन्यजीवों को आकर्षित न करने वाली फसलों तथा कृषि विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। पुलिस क्षेत्राधिकारी मिहींपुरवा प्रद्युम्न सिंह ने मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में सहयोग देने तथा सिंचाई खण्ड शारदानगर की उप खण्ड अधिकारी जुथिका नायक ने जलीय जीवों के संरक्षण एवं रेस्क्यू में हर संभव सहयोग करने की बात कही। 

कार्यशाला का संचालन करते हुए में संचालन करते हुए डब्लूडब्लूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने तराई हाथी रिज़र्व, हाथी संरक्षण की उपयोगिता के साथ साथ ग्रामवासियों के नुकसान को न्यून से न्यूनतम करने में विभिन्न विभागों की भूमिका के बारे में जानकारी प्रदान करने हेतु कार्यशाला आयोजन वन्य जीवन प्रभा की अनूठी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से सभी विभागों के अधिकारी और स्थानीय समुदाय हाथी संरक्षण के लिए एकजुट हुए हैं।

इस अवसर पर क्षेत्रीय वनाधिकारी कतर्नियाघाट आशीष गौड, निशानगाढ़ा के सुरेन्द्र श्रीवास्तव, सुजौली के रोहित यादव, पशु चिकित्सा अधिकारी सुजौली डॉ. विपिन बिहारी वर्मा, विद्युत विभाग के एसएसओ जितेन्द्र कुमार, सिंचाई खण्ड शारदा नगर के अ.अभि. गौरव कुमार व विनोद कुमार गोंड, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एस के गौतम, ग्राम प्रधान कठोतिया रामपति चौहान व बर्दिया के श्यामलाल, बाघ मित्र गुलरा राजेश कुमार व भूपेंद्र सिंह, गजमित्र गुरदास सिंह, आशाराम, वंशराम व जयनारायण, प्रगतिशील किसान मलकीत सिंह चीमा, इको विकास समिति अध्यक्ष विशुनटांडा गंगाराम तथा डब्लूडब्लूएफ के फील्ड सहायक मंसूर अली और न्यूज संस्था के फील्ड सहायक राजा हसन सहित अन्य सम्बन्धित मौजूद रहे। 

 

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सूरज तिवारी

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