रातों-रात अवैध बॉक्साइट उत्खनन प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल
अतुल्य भारत चेतना (मृत्युंजय मिश्रा)
चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट के हृदय में स्थित सिद्धा पर्वत इन दिनों खनिज माफियाओं की क्रूर लूट का शिकार बनता दिख रहा है। यह पर्वत चौरासीकोशीय परिक्रमा मार्ग का महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थल है, जो रामायण काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। लेकिन वर्तमान में इस संवेदनशील क्षेत्र में रात के अंधेरे में भारी मशीनों से अवैध बॉक्साइट उत्खनन का सिलसिला तेज हो गया है।
माफियाओं की रणनीति और गतिविधियां
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार:

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- प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्र में रात 10 बजे के बाद भारी जेसीबी, पोकलेन जैसी मशीनों से पहाड़ों को खोदा जा रहा है।
- बड़ी संख्या में ट्रक लगातार बॉक्साइट लोड कर रातों-रात ले जाते हैं।
- मशीनों की गड़गड़ाहट और ट्रकों की आवाजें अब आसपास के गांवों में आम हो गई हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख चिंताएं
ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा इस प्रकार व्यक्त की है:
- पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है, जिससे पहाड़ की संरचना कमजोर हो रही है।
- पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है – मिट्टी का कटाव, जल स्रोतों का सूखना और जैव-विविधता का विनाश हो रहा है।
- धार्मिक आस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। सिद्धा पर्वत पर स्थित प्राचीन चरण चिह्न, गुफाएं और अन्य पुरातात्विक अवशेष स्थायी रूप से नष्ट होने की कगार पर हैं।

बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस को लिखित एवं मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोग हैरान हैं कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही अवैध गतिविधियां प्रशासन की नजरों से कैसे छिप रही हैं। कई लोग इसे प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी या संभावित मिलीभगत के रूप में देख रहे हैं।
सिद्धा पर्वत का महत्व
सिद्धा पर्वत चित्रकूट की चौरासीकोशी परिक्रमा का अभिन्न अंग है। मान्यता है कि यहां भगवान राम ने वनवास के दौरान राक्षसों का संहार करने की प्रतिज्ञा ली थी। इस पर्वत पर कई प्राचीन गुफाएं, जलाशय और प्राकृतिक चिह्न मौजूद हैं, जो हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं।
मांग और अपील
स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी अब सख्त मांग कर रहे हैं:
- तत्काल छापेमारी कर मशीनें और वाहन जब्त किए जाएं
- अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो
- सिद्धा पर्वत को विशेष संरक्षित क्षेत्र घोषित कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए
- खनिज विभाग और जिला प्रशासन जवाबदेही तय करें

यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो चित्रकूट की यह अनमोल धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर स्थायी रूप से नष्ट हो सकती है। प्रशासन की चुप्पी अब केवल सवाल नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

