शिक्षक चरित्र और संस्कार गढ़ने वाला सच्चा मार्गदर्शक होता है- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी
अतुल्य भारत चेतना (ब्यूरो चीफ- हाकम सिंह रघुवंशी)
गंज बासौदा/विदिशा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चर्च वाली गली बरेठ रोड स्थित सेवा केन्द्र में भव्य टीचर्स स्नेह मिलन व सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें अनेकानेक शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मधुर गीत से हुआ, जिसने वातावरण को कृतज्ञता और पवित्रता से भर दिया। समारोह में वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने सर्वोच्च शिक्षक परमपिता परमात्मा की शिक्षाओं से अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक ही है जो निस्वार्थ एवं समान भाव से अपना सर्वस्व विद्यार्थियों के प्रति न्योछावर कर देता है। वो ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि चरित्र और संस्कार गढ़ने वाला सच्चा मार्गदर्शक होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर बनाना नहीं, बल्कि जीवन को मूल्यनिष्ठ और आत्मिक शक्तियों से सम्पन्न बनाना होना चाहिए। क्योंकि शिक्षक ही भविष्य गढ़ते हैं।

जब शिक्षक स्वयं ईश्वर से शक्ति लेकर आदर्श जीवन जीते हैं, तो उनके छात्र भी जीवनभर प्रेरणा पाते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित प्रिंसिपल और शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसर ने भी विचार व्यक्त किए। विशेष रूप से एग्रीकल्चर महाविद्यालय के डॉक्टर योगेश पटेल, सेंट जोसेफ से बोसी सर, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से प्रिंसिपल शिल्पांजना शर्मा, डॉल्फिन स्कूल से प्रिंसिपल संदीप जेकली, लिटिल फ्लावर स्कूल से प्रिंसिपल छवि राठौर, सेंट एसआरएस स्कूल रजनी मैम समस्त स्टाफ, भारत माता कॉन्वेंट स्कूल स्टाफ सहित उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा शिक्षकों का सम्मान वास्तव में समाज की नींव को सुदृढ़ करने जैसा है। शिक्षक दीपक की भाँति हैं, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में उजाला भरते हैं।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी रुक्मणी बहन ने सुप्रीम शिक्षक परमात्मा शिव का परिचय कराते हुए कहा कि जैसे भौतिक शिक्षा जीवन यापन का आधार देती है, वैसे ही परमात्मा हमें आत्मज्ञान और सच्चे जीवन-मूल्यों की शिक्षा देकर जीवनयापन को सफल और श्रेष्ठ बनाते हैं। परमात्मा शिव ही वह सुप्रीम शिक्षक हैं, जो हमें आत्मा की पहचान कराते हुए सर्वोच्च आचरण की राह दिखाते हैं। जब मनुष्य-शिक्षक भी ईश्वर से जुड़कर पढ़ाते हैं, तो उनके शब्द और संस्कार विद्यार्थियों के हृदय में गहराई तक अंकित हो जाते हैं। परमात्मा सभी मूल्यों का सागर है जिसमें कोई भी पक्षपात नहीं है परम शिक्षक की शक्तियां हम सभी के साथ चलती है। बी के नन्दनी बहन, ने मूल्य-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बताया कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसमें आत्म-संयम, शांति और करुणा का समावेश हो। बीके अनु बहन ने सामूहिक राजयोग ध्यान का अभ्यास कराया, जिसमें सभी शिक्षकों ने आत्मिक शांति और परमात्म शक्ति का अनुभव किया। वातावरण शांति और ऊर्जा से भर उठा। विशेष आकर्षण के रूप में कैंडल लाइट द्वारा “ज्ञान का प्रकाश” फैलाने का संकल्प कराया गया। इसके पश्चात सभी शिक्षकों को सम्मान पत्र और श्रृंगार पट्टिका पहनाकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का संचालन बी.के. मनु बहन ने सहजता और मधुरता से किया तथा समापन पर सभी को ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया गया। पूरा समारोह शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और परमात्मा सुप्रीम शिक्षक की स्मृति में आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत रहा। विभिन्न शिक्षा संस्थानों से अनेक शिक्षकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

