अतुल्य भारत चेतना
संवाददाता – रियासत मलिक
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जहाजपुर,भीलवाड़ा । कुछ महीने बाद नगर निकाय ओर पंचायत चुनाव होने वाले में है ऐसे में जहाजपुर नगर पालिका की आखरी बोर्ड बैठक भी कुछ दिन पहले हो चुकी है या अब एक आखिरी मीटिंग ओर होने वाली है इस महीने में ऐसे में अब जहाजपुर नगर की राजनीति गरमाने लगी है 5 साल से जो नए राजनेता उम्मीद लगाए हुए राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने के लिए उनका इंतजार अब खत्म होने को आया है नए साल की मुबारकबाद ओर शुभकामनाओ के साथ राजनेताओं ने आमजन से बातचीत का दौर चालू कर दिया है इस बीच बहुत से युवा चेहरे इस बार नगर पालिका चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में है और बहुत से पुराने राजनेता अपने वार्ड पर कब्जा जमाए रखने की नियत से लगातार अपने वार्डवासियों का छोटे से छोटा काम भी अपने स्वयं के स्तर पर करने पर दमखम लगाए हुए है।
क्या बीते दिनों हुए जहाजपुर के हालात का जहाजपुर की राजनीति पर कोई असर होगा क्या जहाजपुर की जनता हिन्दू,मुस्लिम की जातिगत लड़ाई को भूल कर जहाजपुर के विकास को वोट करेगी या नफरत की राजनीति में अपने आपको बांटेगी।
क्या जहाजपुर के राजनेता हिन्दू मुस्लिम का नफरती बीज बोकर वोट मांगेगे या विकास को ऊंचाई तक ले जाने के नाम पर वोट मांगेगे।
क्या कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर अपनी खोई हुई सांख फिर से बचा पाएंगे,क्या जहाजपुर में फिर से कांग्रेस का परचम गाड़ पायेंगे नगर पालिका जहाजपुर में कांग्रेस का चेयरमैन बना कर कांग्रेस पार्टी को जहाजपुर में जिंदा रख पायेंगे।
जहाजपुर नगर में परिसीमन के नाम पर मुस्लिम पार्षदों की संख्या कम करने का काम किया गया क्या ये आरोप सही है या गलत क्योंकि मुस्लिम पार्षदों की संख्या अधिकतम 8 हो सकती है परन्तु नए परिसीमन में 4 से ज्यादा पार्षद नहीं बन पाएंगे ऐसे में मुस्लिम नेताओं का अभी तक कोई विरोध सामने नहीं आया है।
ऐसे में इतने कम मुस्लिम पार्षद बनने के बाद क्या नगर पालिका में मुस्लिम वार्डो के विकास की आवाज को मजबूती मिलेगी या उनकी आवाज दबा दी जायेगी।
क्या इस बार भी भाजपा का नगर पालिका पर कब्जा यथावत बना रहेगा क्या चेयरमैन सीट पर नरेश मीणा को भाजपा यथावत बनाए रखेगी या कोई नया भाजपा का चेहरा इस पर विराजमान होगा।
वैसे कुछ दिन पूर्व बोर्ड में पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने जो बात कही उससे साफ जाहिर होता है कि वर्तमान पार्षद में ज्यादा तर पार्षद अगर दुबारा जीतकर नगर पालिका पहुंचते है तो चेयरमैन की सीट पर नरेश मीणा का यथावत रहना तय है।
क्या कांग्रेस पार्टी कुछ नया तरीका इस्तेमाल कर कांग्रेस पार्टी का फिर से जहाजपुर में अपना झंडा गाड़ पायेगी।
क्या मुस्लिम नेताओं ने जो एक साल पूर्व कांग्रेस से इस्तीफे दिए थे वो यथावत रहेंगे या फिर से कांग्रेस की गोद में आकर बैठ जाएंगे या मुस्लिम नेता निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे या SDPI या AIMIM से चुनाव लड़ेंगे।
देखते है आखिर किस तरह जहाजपुर की राजनीति में एक भूचाल आता है भाजपा वर्सेज कांग्रेस या अन्य पार्टियों का बोलबाल पड़ते रहिए अतुल्य भारत चेतना की न्यूज ओर अपडेट रहिए जहाजपुर की हर तरह की खबर से।

