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चित्रकूट: बिरसिंहपुर तहसील में शासकीय भूमि पर महुआ पेड़ों की खुलेआम अवैध कटाई, ग्रामीणों में आक्रोश

चित्रकूट: बिरसिंहपुर तहसील में शासकीय भूमि पर महुआ पेड़ों की खुलेआम अवैध कटाई, ग्रामीणों में आक्रोश

अतुल्य भारत चेतना (मृत्युंजय मिश्रा)

बिरसिंहपुर/चित्रकूट। जिले के बिरसिंहपुर तहसील अंतर्गत राजस्व ग्राम मौहरिया में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दबंग तत्वों द्वारा शासकीय भूमि पर लगे कीमती महुआ के पेड़ों की बिना किसी अनुमति के अवैध कटाई की जा रही है। यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि इन पेड़ों की नीलामी प्रक्रिया अभी लंबित चल रही है और कोई भी आधिकारिक आदेश या अनुमति जारी नहीं हुई है।

घटना का विवरण

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दिनदहाड़े यह अवैध कटाई की जा रही है। काटे गए महुआ के पेड़ों को ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से ढोया जा रहा है। मौके पर प्रशासनिक अमले या वन विभाग की कोई टीम मौजूद नहीं दिखी, जिससे सरकारी संपत्ति को खुलेआम नुकसान पहुंचाया जा रहा है। महुआ के पेड़ उत्तर प्रदेश में संरक्षित प्रजातियों में शामिल हैं, जिनकी कटाई के लिए सख्त नियम हैं। इन पेड़ों से ग्रामीणों को फूल, फल और अन्य उत्पाद प्राप्त होते हैं, जो उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

ग्रामीणों के आरोप और मांगें

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस अवैध कटाई की जानकारी क्षेत्रीय पटवारी को पहले ही दे दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका भी गहरा गई है।

ग्रामीणों ने निम्नलिखित सवाल उठाए हैं:

  • जब पेड़ों की नीलामी प्रक्रिया अभी लंबित है, तो कटाई की अनुमति किसने और कैसे दी?
  • क्या राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन दबंगों के सामने बेबस हो चुका है?
  • शासकीय संपत्ति की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

ग्रामीणों ने तत्काल मांग की है कि:

  • अवैध कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  • दोषी व्यक्तियों और दबंगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • पूरे मामले की उच्च स्तरीय (जिला या राज्य स्तर की) जांच कराई जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगे।

यह घटना पर्यावरण संरक्षण, वन संपदा और ग्रामीण आजीविका के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रही है। महुआ जैसे पेड़ न केवल जैव-विविधता को बनाए रखते हैं, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के लिए आर्थिक महत्व भी रखते हैं।

अतुल्य भारत चेतना इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा करता है। आमजन से भी अनुरोध है कि ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों या स्थानीय मीडिया को दें ताकि समय रहते रोकथाम हो सके।

महुआ पेड़ों के संरक्षण नियम:

महुआ (वानस्पतिक नाम: Madhuca longifolia) एक महत्वपूर्ण बहुउपयोगी वृक्ष है, जो विशेष रूप से मध्य और उत्तर भारत के आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है। यह पेड़ फूल, फल, बीज और तेल के लिए जाना जाता है, जो ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। भारत में महुआ को संरक्षित प्रजाति के रूप में माना जाता है, और इसकी कटाई पर सख्त नियम लागू हैं।

भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत महुआ

  • Indian Forest Act, 1927 की धारा 2 में महुआ के फूल (mahua flowers) और बीज (mahua seeds) को वन उत्पाद (forest produce) के रूप में परिभाषित किया गया है, चाहे वे जंगल से हों या बाहर से।
  • आरक्षित या संरक्षित वनों में महुआ पेड़ों की कटाई, फूल/बीज संग्रहण आदि पर सख्त प्रतिबंध हैं, और बिना अनुमति के दंडनीय अपराध है।
  • कई राज्यों में महुआ को विशेष संरक्षण दिया जाता है, क्योंकि यह आदिवासी समुदायों के लिए “जीवन का पेड़” माना जाता है।

उत्तर प्रदेश में महुआ पेड़ों के संरक्षण नियम

उत्तर प्रदेश में महुआ पेड़ों की कटाई उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 (U.P. Protection of Trees Act, 1976) के तहत नियंत्रित है। 2019-2020 में योगी सरकार ने इस अधिनियम में संशोधन कर 29 प्रजातियों के पेड़ों को संरक्षित श्रेणी में शामिल किया, जिसमें महुआ प्रमुख है।

  • निजी भूमि पर भी बिना अनुमति कटाई प्रतिबंधित: महुआ सहित इन 29 प्रजातियों (जैसे आम, नीम, साल, पीपल, बरगद, शीशम आदि) को काटने के लिए वन विभाग से पूर्व अनुमति अनिवार्य है। यह नियम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू है।
  • अनुमति की प्रक्रिया:
  • आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है।
  • एक पेड़ काटने के बदले 10 नए पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेनी पड़ती है (शपथपत्र के साथ)।
  • यदि अपनी भूमि पर जगह न हो, तो वन विभाग को शुल्क देकर उनके द्वारा रोपण करवाया जा सकता है।
  • अनुमति शुल्क: लगभग 200 रुपये प्रति पेड़ (2020 के बाद बढ़ाया गया)।
  • दंड प्रावधान: बिना अनुमति हरा महुआ पेड़ काटने पर जुर्माना (उदाहरण: 20,000 रुपये तक एक केस में) और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पहले जेल का प्रावधान था, लेकिन बाद में संशोधन से जुर्माना बढ़ाया गया।
  • सरकारी/राजस्व भूमि पर: महुआ पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित है, जब तक नीलामी या आधिकारिक आदेश न हो। अवैध कटाई पर वन विभाग/राजस्व अमला तुरंत कार्रवाई कर सकता है।

अन्य राज्यों में स्थिति (तुलनात्मक)

  • मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में महुआ को आदिवासी क्षेत्रों में विशेष संरक्षण मिलता है, और कई मामलों में कलेक्टर की अनुमति जरूरी होती है।
  • सामान्यतः सरकारी भूमि पर महुआ की कटाई नीलामी प्रक्रिया के बाद ही संभव है।

महत्वपूर्ण सलाह

महुआ जैसे पेड़ पर्यावरण, जैव-विविधता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अवैध कटाई न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि कानूनी दंड भी आकर्षित करती है। यदि आपके क्षेत्र में महुआ पेड़ों की कटाई हो रही है, तो तुरंत स्थानीय वन विभाग, पटवारी या पुलिस को सूचित करें।

(नोट: नियम समय-समय पर संशोधित हो सकते हैं। नवीनतम जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट upforest.gov.in या स्थानीय डीएफओ कार्यालय से संपर्क करें।)

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News Desk

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