प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की जयन्ती समारोह एवं विचार गोष्ठी का हुआ आयोजन
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
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डीग – डीग जिले के कस्बा कामां में सैनी मोहल्ला देहली गेट में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की जयन्ती समारोह एवं विचार गोष्ठी का आयोजन पूर्व पार्षद शिव राम सैनी की अध्यक्षता एवं समाजसेवी जगन्नाथ सैनी के मुख्यातिथ्य में किया गया ! माता सावित्री फुले के चित्र पर तिलक, पुष्प माला व दीप प्रज्ज्वलित कर मिठाई का वितरण किया गया, वक्ताओं द्वारा बताया गया कि माता सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नया गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1841 में ज्योतिराव फुले से हुआ था। सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षका,विद्या की देवी व समाज सुधारक थीं। महात्मा ज्योतिराव को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों का शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था उस समय बालिकाओं के लिये स्कूल खोलना सही नहीं माना जाता था ! जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में संकीर्ण मानसिकता के लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर फेंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल कर दूसरी साडी पहन लेती थीं। परंतु अपने लक्ष्य पर अडिग रहते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अविष्मरणीय कार्य किया! अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा हमें माता सावित्री बाई फुले जी से मिलती है!
इस अवसर पर सूर्य प्रकाश सैनी,रवि सैनी, कृष्ण कुमार जाटव, अनिता सैनी,नीरज सैनी, मनीष सैनी, चंचल सैनी, रमेश साहू, स्नेहा, साहू, सैंकड़ों बालक एवं बालिकाऐ व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे !

