इसे भी पढ़ें (Read Also): अमर शहीद चंदन राय की पुण्य तिथि पर आगामी 20 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम की तैयार की गई रूपरेखा
नागौर जिले के थाँवला कस्बे के प्रतिभाशाली युवा कलाकार प्रियेन्द्र कुमावत ने अपनी उत्कृष्ट कला प्रतिभा के दम पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संभाग स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अपना चयन सुनिश्चित किया है। उनकी इस सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरे थाँवला क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।यह प्रतिष्ठित संभाग स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता संभागीय आयुक्त के निर्देशन में आयोजित की गई, जिसमें अजमेर संभाग के विभिन्न जिलों से आए चयनित एवं श्रेष्ठ कलाकारों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के लोक कलाकार वर्ग में प्रियेन्द्र कुमावत द्वारा प्रस्तुत की गई कलाकृति को निर्णायक मंडल ने सर्वश्रेष्ठ मानते हुए प्रथम स्थान प्रदान किया। उनकी रचना में पारंपरिक लोक संस्कृति, भावनात्मक गहराई और तकनीकी दक्षता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिसने निर्णायकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
उल्लेखनीय है कि प्रियेन्द्र कुमावत की यह सफलता अचानक नहीं है। इससे पूर्व भी उन्होंने जिला कलेक्टर के निर्देशन में आयोजित जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। जिला स्तर से लेकर संभाग स्तर तक लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अब राज्य स्तर तक पहुंचना उनकी मेहनत, लगन और कला के प्रति अटूट समर्पण का स्पष्ट प्रमाण है।
प्रियेन्द्र कुमावत की कला यात्रा में उनके परिवार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनके पिता स्वर्गीय सत्यानारायण कुमावत स्वयं राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त कलाकार रह चुके थे। कला के प्रति उनका समर्पण और अनुभव प्रियेन्द्र के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। पारिवारिक कला विरासत का प्रभाव उनकी कलाकृतियों में साफ झलकता है, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
प्रियेन्द्र कुमावत की इस उपलब्धि पर थाँवला सहित आसपास के क्षेत्रों में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। क्षेत्र के कला प्रेमियों, युवाओं, शिक्षकों एवं समाज के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम और ऊंचा करने की कामना की है।
निस्संदेह, प्रियेन्द्र कुमावत की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और थाँवला की कला पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

