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Sun. Jan 11th, 2026

बुढार सर्कल में पकड़ी गई भारी अवैध लकड़ी, फिर भी कार्रवाई अधूरी दो प्रभार वाले अधिकारी सलीम खान और सर्कल प्रभारी कमला वर्मा पर सवाल, संरक्षण किसका?

शहडोल/वन परिक्षेत्र बुढार सर्कल में हाल ही में पकड़ी गई भारी मात्रा में अवैध सागौन व साल की लकड़ी ने पूरे शहडोल संभाग में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी जब्ती बुढार सर्कल क्षेत्र में हुई, इसके बावजूद सर्कल से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई अब तक सामने नहीं आई है।*

*इस पूरे मामले में जहां वन परिक्षेत्र अधिकारी सलीम खान, जो वर्तमान में दो प्रभार संभाले हुए हैं, की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं बुढार सर्कल में पदस्थ कमला वर्मा के विरुद्ध भी कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।पत्रकार की शिकायत से हुआ खुलासा, फिर भी अधिकारी* *सुरक्षित स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध लकड़ी का यह मामला किसी विभागीय सतर्कता से नहीं, बल्कि एक निर्भीक पत्रकार की शिकायत के बाद सामने आया। पत्रकार ने जान* *जोखिम में डालकर तथ्य जुटाए, लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी बुढार सर्कल में कैसे जमा हुई?और जब पकड़ी गई, तो सर्कल प्रभारी कमला वर्मा और क्षेत्रीय अधिकारी सलीम खान पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?भ्रष्टाचार के कई आरोप, जांच में* *निष्क्रियता स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार बुढार वन परिक्षेत्र में—मजदूरों की मजदूरी भुगतान में गंभीर अनियमितताएं,नियमों के विरुद्ध आरा मशीनों का संचालन,अवैध गतिविधियों की जानकारी के बावजूद जांच में लापरवाही,और बड़े मामलों में जिम्मेदार* *अधिकारियों को बचाने की प्रवृत्ति लगातार सामने आती रही है। इसके बावजूद न तो यह बताया गया कि कमला वर्मा के संरक्षण अवैध करोबार*

 *संचालित था या नहीं, और न ही यह स्पष्ट है*कि सलीम खान के विरुद्ध क्या विभागीय कार्रवाई की गई।*

*इतनी लकड़ी बिना संरक्षण संभव नहीं!जनता और सामाजिक संगठनों का सीधा कहना है कि—बिना सर्कल स्तर के संरक्षण इतनी बड़ी मात्रा में अवैध कटाई, भंडारण और परिवहन संभव ही नहीं है।*

*यदि अधिकारियों को जानकारी थी और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संरक्षण है,और यदि जानकारी नहीं थी, तो यह घोर प्रशासनिक विफलता है।दोनों ही स्थितियां विभाग को कटघरे में खड़ा करती हैं।जनता का भरोसा टूटने की कगार पर*

*स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इसी प्रकार—हर बड़े मामले में केवल दिखावटी कार्रवाई होगी,जिम्मेदार अधिकारी सुरक्षित रहेंगे,*

*और शिकायतकर्ताओं व पत्रकारों को ही जोखिम उठाना पड़ेगा,तो आने वाले समय में वन विभाग से जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा, और बढ़ता आक्रोश किसी बड़ी और अप्रिय घटना का रूप भी ले सकता है,* *जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों पर होगी।दक्षिण वन मंडल* *अधिकारी से सीधे सवाल*

*अब शहडोल संभाग की जनता यह जानना चाहती है—बुढार सर्कल में पकड़ी गई अवैध लकड़ी मामले में कमला वर्मा की क्या भूमिका तय की गई?*

*दो प्रभार संभाल रहे सलीम* *खान पर क्या विभागीय कार्रवाई हुई?इस पूरे प्रकरण में कितने लोगों को आरोपी बनाया गया और किन्हें बचा लिया गया?क्या जांच निष्पक्ष और पारदर्शी है या सिर्फ कागजी औपचारिकता?यह खबर सिर्फ लकड़ी पकड़ने की नहीं,यह सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा है।अब चुप्पी नहीं, जवाब जरूरी है।*

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अनिल पाण्डेय

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