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Sat. Jan 17th, 2026

नगर परिषद बकहो में पद का दुरुपयोग! अध्यक्ष पति की कथित तानाशाही से कर्मचारी मानसिक प्रताड़ना का शिकार

शहडोल जिले के नगर परिषद बकहो पद और दायित्वों का दुरुपयोग कर मनमानी करना मानो आज के समय में एक नया फैशन बनता जा रहा है। कुछ ऐसे ही गंभीर हालात इन दिनों नगर परिषद बकहो में सामने आ रहे हैं, जहाँ अध्यक्ष पति के रौब और रुतबे के आगे एक शासकीय कर्मचारी खुद को असहाय महसूस कर रहा है और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनता जा रहा है।

बीते दिनों नगर परिषद से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। यह संभावना जताई गई कि उक्त ऑडियो अध्यक्ष पति का है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। हैरानी की बात यह है कि मामले की जांच शुरू होने से पहले ही पीड़ित शिकायतकर्ता जितेंद्र दहिया पर लावारिस सूत्रों के माध्यम से कई आरोप मढ़ दिए गए।

जांच से पहले ही आरोपों की बौछार

जितेंद्र दहिया पर यह आरोप लगाए गए कि वे समय पर कार्यालय नहीं आते, नगर परिषद क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की निगरानी व नियंत्रण की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की, जिससे दिन में लाइटें बंद नहीं हो पातीं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले वार्डों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जिससे आम जनता परेशान है।

पाँच वर्षों से सेवा दे रहा कर्मचारी, अब सवालों के घेरे में

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि विगत पाँच वर्षों से इलेक्ट्रीशियन के पद पर कार्यरत कर्मचारी लगातार नगर परिषद में अपनी सेवाएं देता आ रहा है। यदि व्यवस्थाएं इतनी ही खराब थीं तो अब तक जनप्रतिनिधियों को दिन में जलती लाइटें क्यों नहीं दिखीं?

गौरतलब है कि नगर परिषद बकहो के अंतर्गत कुल 15 वार्ड आते हैं, जिनमें से 4 वार्डों का संचालन ओरिएंट पेपर मिल अमलाई द्वारा किया जाता है, जबकि शेष 11 वार्ड नगर परिषद की देखरेख में आते हैं।

कर्मचारी ने आरोपों का किया खंडन

इलेक्ट्रीशियन पद पर कार्यरत कर्मचारी जितेंद्र दहिया ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और षड्यंत्रपूर्ण बताते हुए सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि नगर परिषद के लेटर पैड पर अध्यक्ष द्वारा की गई शिकायत में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन वार्डों की बात की जा रही है।

कर्मचारी का दावा है कि नगर परिषद के अधीन आने वाले 11 वार्डों में सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं। यदि जांच अधिकारी चाहें तो मौके पर जाकर जांच कर सकते हैं। कहीं भी कोई खराबी पाए जाने पर वे स्वयं तत्काल सुधार कराते हैं।

दिन में लाइट जलने की सच्चाई

दिन में स्ट्रीट लाइट जलने को लेकर कर्मचारी ने स्पष्ट किया कि दिन के समय मेंटेनेंस कार्य किया जाता है। इसी दौरान निगरानी के लिए सभी फेस की लाइटें एक साथ जलाकर जांच की जाती है, ताकि शाम होने से पहले किसी भी खराबी को दूर किया जा सके। इसी दौरान किसी व्यक्ति द्वारा फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

“मेरे खिलाफ रची जा रही है साजिश”

अपने बयान में कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पूर्व में भी एनएच-47 पर मेंटेनेंस कार्य के दौरान फोटो वायरल कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई थी। कर्मचारी का कहना है कि अध्यक्ष पति द्वारा उनके खिलाफ लगातार षड्यंत्र रचा जा रहा है।

उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई—

कर्मचारी के अनुसार, उन्होंने नगर परिषद के स्ट्रीट पोल से अध्यक्ष पति के निजी ग्राउंड में चल रहे टूर्नामेंट के लिए लाइट देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

पूरा मामला पद के दुरुपयोग, दबाव की राजनीति और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं, अथवा एक शासकीय कर्मचारी यूं ही मानसिक प्रताड़ना का शिकार होता रहेगा।

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अनिल पाण्डेय

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