अतुल्य भारत चेतना
शुभम शर्मा
जयपुर। राजधानी जयपुर में सोमवार सुबह से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जेसीटीसीएल (JCTCL) की 100 लो-फ्लोर बसें अचानक बंद होने से शहर की सड़कें अव्यवस्थित हो गईं और बस स्टॉप पर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
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बगराना आगार में लो-फ्लोर बसों का संचालन संभालने वाली निजी कंपनी पारस ट्रेवल्स के ड्राइवर और कंडक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने, ईएसआई-पीएफ लाभ, कार्यस्थल सुरक्षा और मृत चालक के परिवार को आर्थिक सहायता जैसी विभिन्न मांगों को लेकर डिपो के बाहर प्रदर्शन शुरू किया।
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सुबह 6 बजे से ही शहर की मुख्य रूटों पर बसें गायब हो गईं, जिसके कारण ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी और अस्पताल के मरीज भारी परेशानी में दिखे। मजबूरन लोगों को ऑटो, कैब और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा—जिससे किराया भी बढ़ गया और समय भी ज्यादा लगा।
50 हजार से ज्यादा यात्रियों पर सीधा असर
जयपुर में कुल 200 लो-फ्लोर बसें संचालित होती हैं—
100 टोडी डिपो से
100 बगराना डिपो से
बगराना डिपो की बसों के ठप होने से शहर की आधी लो-फ्लोर बसें सड़कों से गायब हो गईं। प्रतिदिन करीब 1.5 लाख यात्री इन बसों से सफर करते हैं। अनुमान है कि आज अकेले 50 हजार से अधिक यात्रियों को बस न मिलने के कारण परेशानी उठानी पड़ी। गुरुग्राम रोड, अजमेर रोड, मालवीय नगर, मानसरोवर, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सीकर रोड जैसे रूटों पर यात्रियों को सुबह से बसों का इंतजार करते देखा गया।
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हड़ताल क्यों? कर्मचारियों की मुख्य मांगें
हड़ताल पर गए ड्राइवर-कंडक्टरों का कहना है कि—
वेतन बढ़ाया जाए
ESIC और PF की सुविधा दी जाए
मृत चालक के परिवार को आर्थिक सहायता मिले
ओवरटाइम भुगतान नियम अनुसार किया जाए
कार्यस्थल सुरक्षा बढ़ाई जाए
कर्मचारी लंबे समय से इन मांगों को रख रहे थे, लेकिन समाधान न मिलने पर उन्होंने अचानक काम बंद कर दिया।
परिवहन व्यवस्था चरमराई, यात्री परेशान
लो-फ्लोर बसें जयपुर की लाइफलाइन मानी जाती हैं—विशेषकर समय पर ऑफिस, स्कूल और अस्पताल पहुंचने वालों के लिए। हड़ताल के कारण न सिर्फ यात्रियों को दिक्कत हुई, बल्कि सुबह की ट्रैफिक दबाव भी बढ़ गया, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों ने निजी वाहन और ऑटो का सहारा लिया।
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प्रशासन क्या कर रहा है?
जेसीटीसीएल अधिकारियों का कहना है कि—
हड़ताल खत्म करवाने के लिए कंपनी प्रबंधन से बातचीत जारी है
शहर की रूटों पर अस्थायी बसें लगाने पर भी विचार किया जा रहा है
यात्रियों को राहत देने के लिए जल्द कोई निर्णय लिया जाएगा
हालांकि सुबह से दोपहर तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई और शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था लगभग आधी क्षमता पर ही चल रही है।

