स्वयंसेवी संस्थाओं और कंपनी प्रबंधकों ने मिलकर सीएसआर फंड के डकारे करोड़ों, क्षेत्रीय लोगों का आरोप
अतुल्य भारत चेतना
सचिन
मालनपुर। औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में पिछले करीब 40 वर्षों से सैकड़ो छोटी बड़ी इकाइयां संचालित है तो कई बड़े उद्योग बंद भी हो चुके हैं लेकिन फैक्ट्री प्रबंधकों और शासन की अनदेखी तो प्रशासन की मनमानी के चलते कभी भी कंपनियों ने अपना फर्ज ईमानदारी से नहीं निभाया है बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को खुश करने में ही रुचि दिखाई है और आम जनता आज भी अपने हक से वंचित है दरअसल सीएसआर फंड उन वित्तीय संसाधनों को संदर्भित करता है जिन्हें कंपनियों द्वारा सामाजिक पर्यावरणीय और सामुदायिक विकास से संबंधित गतिविधियों का समर्थन करने के लिए आवंटित किया जाता है
इसे भी पढ़ें (Read Also): Vidisha news; थाना नटेरन पुलिस ने हत्या के प्रयास के तीन आरोपियों को 24 घंटे में किया गिरफ्तार
इसे भी पढ़ें : उनसे पूछो मंदिर क्या है ?
भारत में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम 2013 की तहत सीएसआर को कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया है कुछ निर्धारित वित्तीय मानदंडों अथवा टर्नओवर को पूरा करने वाली कंपनियों के लिए अपने पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है सीएसआर फंड का उपयोग विभिन्न सामाजिक जनहित के कार्यों के लिए किया जाता है जैसे शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं गरीबी उन्मूलन लैंगिक समानता पर्यावरण स्थिरता और ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर खर्च किया जाता है कंपनियां इन गतिविधियों को सीधे तौर पर या गैर सरकारी संगठनों अथवा एनजीओ के माध्यम से लागू कर सकती हैं बशर्ते वे संगठन निर्धारित पात्रता को पूरा करते हो लेकिन औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में कंपनियों ने सीएसआर फंड में भी बड़ा गोलमाल किया है क्योंकि यहां के जिम्मेदार लोगों और नेताओं ने कभी भी प्रयास नहीं किया कि सीएसआर फंड से जनता की हित के कार्यों को किया जाए बल्कि अपनी जेबें भरते रहे हैं यही कारण है कि औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर आज भी विकसित नहीं हो सका है तो दूसरी ओर कई कंपनियों के द्वारा फैलए जा रहे प्रदूषण से परेशान है l कंपनी प्रबंधकों ने मालिकों को गुमराह कर स्थानीय नेताओं को खुश कर अपनी जेबें भरी है यही कारण है कि एनजीओ के द्वारा कराए गए सीएसआर के कार्य जमीन पर दिखाई नहीं देते हैं लोगों का कहना है कि एनजीओ ने हमेशा सीएसआर फंड से कार्यक्रम आयोजित कर फोटो खिंचाकर फॉर्मेलिटी कर करोड़ों का गोलमाल किया है जिनकी बड़े स्तर पर जांच की जाना चाहिए l
इसे भी पढ़ें : …लेकिन विडम्बना पता है क्या है?
स्थानीय लोगों ने कैडबरी प्रबंधन लगाए सीएसआर फंड में घपले के आरोप
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामनारायण हिंडोलिया औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में संचालित मोड़लेज (कैडबरी) कंपनी पर सीएसआर फंड में गड़बड़ झाले का आरोप लगा चुके हैंl उन्होंने पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर भिंड को पत्र लिखकर जांच कराए जाने की मांग की थी तो वही क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता बृजेंद्र पाल बंसल ने भिंड के पूर्व कलेक्टर संजीव श्रीवास्तवद्वारा को शिकायत कर सीएसआर फंड में हुए घपले की जांच करने की मांग की थी, उन्होंने पत्र में उल्लेख किया था कि कंपनी प्रबंधन और स्वयंसेवी संस्था सामाजिक कार्यों के नाम पर सीएसआर फंड बंदर बांट कर हड़प रही है उन्होंने तो पत्र में यहां तक मांग की थी कि बाकायदा एक समिति बनाई जाए जिसमें प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि हो और उनकी देखरेख मे सी एस आर की राशि सामाजिक और जनहित कार्यों पर खर्च की जाए तो क्षेत्र की तस्वीर ही बदल जाएगी l
इनका कहना है
मुझे क्षेत्रीय लोगों से जानकारी मिली है कि कैडबरी कंपनी के अलावा अन्य कंपनियों में सीएसआर फंड के नाम पर करोड़ों का घपला हुआ हैl मैं इस संबंध में कलेक्टर से बात करूंगा और इस मामले को विधानसभा में उठाऊंगा

