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Chhindwara news; राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर अष्टांग आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में उत्साहपूर्ण आयोजन: पीएम मोदी की पहल की सराहना

अतुल्य भारत चेतना
अखिल सुर्यवंशी

चंदनगांव/ छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आज अष्टांग आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, भारतादेव वार्ड क्रमांक 36, चंदनगांव में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिवस पूर्व में धन्वंतरी जयंती के अवसर पर मनाया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर अब इसे 23 सितंबर को मनाने का निर्णय लिया गया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाना है, ताकि इस प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वार्ड क्रमांक 36 के पार्षद दिवाकर सदारंग सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने आयुर्वेद की महत्वता पर प्रकाश डाला।

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कार्यक्रम का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का आयोजन आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को बढ़ावा देने और लोगों में इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किया गया। मुख्य अतिथि दिवाकर सदारंग ने अपने संबोधन में कहा कि इस दिवस की तिथि में परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा, “आज विश्व पटल पर आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का काम यदि किसी ने किया है, तो वह भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं। उनकी पहल से आयुर्वेद न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में एक प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में उभर रहा है।”

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कार्यक्रम में आयुर्वेद की संक्षिप्त व्याख्या करते हुए डॉक्टर रजनीश आलोनकर ने बताया कि “आयुर्वेद दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘आयु’ और ‘वेद’। ‘आयु’ का अर्थ जीवन से है, जबकि ‘वेद’ ज्ञान का प्रतीक है। इस प्रकार, आयुर्वेद जीवन के ज्ञान की वह प्राचीन विज्ञान है जो प्राकृतिक तरीकों से स्वास्थ्य को बनाए रखने पर जोर देता है।” उनके वक्तव्य ने उपस्थित लोगों को आयुर्वेद की बुनियादी समझ प्रदान की और इसे दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रमुख उपस्थितियां और गतिविधियां

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दिवाकर सदारंग के अलावा आयुष अधिकारी नितिन टेखरे, रेवाराम साहू, डॉक्टर रजनीश आलोनकर और रोशन सिंगनापुरे जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए। इनकी उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामय बनाया। परिचर्चा के दौरान आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें इसके प्राकृतिक उपचार, जड़ी-बूटियों का महत्व और आधुनिक चिकित्सा से इसका सामंजस्य शामिल था।

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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने आयुर्वेद को अपनाने की शपथ ली और इसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्धता जताई। आयोजन अष्टांग आयुर्वेदिक हॉस्पिटल के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जहां अस्पताल के स्टाफ और स्थानीय निवासियों ने सक्रिय भागीदारी की।

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समापन और शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि दिवाकर सदारंग और डॉक्टर रजनीश आलोनकर ने सभी उपस्थित जनों को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति आयुर्वेद को अपने जीवन का हिस्सा बनाए, ताकि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीया जा सके। समापन के साथ ही आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने स्थानीय समुदाय में आयुर्वेद के प्रति उत्साह जगाया। यह आयोजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद की महत्वता को रेखांकित करता है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल को स्थानीय स्तर पर समर्थन प्रदान करता है। भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों से आयुर्वेद को और अधिक लोकप्रिय बनाने की उम्मीद है।

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News Desk

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