अतुल्य भारत चेतना (आशुतोष सूर्यवंशी)
चौरई (छिंदवाड़ा जिला, मध्य प्रदेश), 12 जनवरी 2026 — स्वामी विवेकानंद की जयंती, जिसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश तथा इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, मध्य प्रदेश राज्य शाखा के निर्देशानुसार शासकीय महाविद्यालय चौरई में दिनांक 6 जनवरी 2026 से 12 जनवरी 2026 तक ‘सेवा सप्ताह’ का आयोजन किया गया। इस सप्ताह के दौरान विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक तथा सेवा-उन्मुख गतिविधियाँ बड़ी उत्साहपूर्ण ढंग से संपन्न हुईं।
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कार्यक्रमों का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य श्री मुकेश कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम अधिकारी श्री चन्द्रशेखर उसरेठे के कुशल नेतृत्व में हुआ। सेवा सप्ताह का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन, उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान तथा युवाओं में सेवा-भावना जागृत करना था।
प्रमुख गतिविधियाँ एवं कार्यक्रम
सेवा सप्ताह के दौरान स्वामी विवेकानंद के विचारों पर केंद्रित निम्नलिखित प्रतियोगिताएँ एवं कार्यक्रम आयोजित किए गए:
- निबंध लेखन प्रतियोगिता — स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर।
- संगोष्ठी, वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिताएँ — युवाओं में आत्मविश्वास एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करने हेतु।
- ‘स्वच्छ राष्ट्र, स्वस्थ समाज’ अभियान — स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर प्रदर्शनी तथा जन-जागरूकता गतिविधियाँ।
- ‘स्वस्थ युवा, स्वस्थ भारत एवं नशामुक्त समाज’ अभियान — नशामुक्ति जागरूकता, नुक्कड़ नाटक तथा जन-जागरूकता रैली का आयोजन।
- स्वास्थ्य शिविर — छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य जाँच एवं परामर्श।
- स्वैच्छिक रक्तदान शिविर — यह शिविर सेवा सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि रही, जिसमें महाविद्यालय के प्राचार्य श्री मुकेश कुमार ठाकुर, डॉ. पुष्करराज मालवीया, श्री मुदस्सर खान, श्री दुर्गेश मानव तथा एनएसएस स्वयंसेवकों कुमारी शिवानी यादव, कुमारी श्रेया रघुवंशी, कुमारी आर्या श्रीवास, सुशील उईके सहित कुल 23 यूनिट रक्तदान किया गया।
इन सभी कार्यक्रमों में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं, एनएसएस तथा रेडक्रॉस इकाई के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सहयोग एवं आभार
कार्यक्रमों के सुचारु संचालन में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापकों डॉ. राजेश कहार, डॉ. फरहत हक, श्री विजय गजभिये, श्री अशोक राजपूत, श्री राहुल नागले, श्री विपुल वासनिक तथा अन्य प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।
महाविद्यालय प्रशासन ने सेवा सप्ताह के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। इस प्रकार का आयोजन न केवल स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवंत रखता है, बल्कि युवा पीढ़ी में सेवा, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वामी विवेकानंद जी के दर्शन पर विस्तार
स्वामी विवेकानंद (1863-1902) भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद के एक महान प्रतीक थे। उनका दर्शन मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत पर आधारित था, जिसमें उन्होंने उपनिषदों के सार को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। वे रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और उन्होंने वेदांत, योग तथा भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनका दर्शन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक, सामाजिक और राष्ट्र-उत्थान से जुड़ा हुआ था। नीचे उनके प्रमुख दार्शनिक विचारों को विस्तृत हेडिंग्स के साथ समझाया गया है:
1. अद्वैत वेदांत: आत्मा और ब्रह्म की एकता
स्वामी विवेकानंद का दर्शन अद्वैत वेदांत का सार था। वे मानते थे कि सारा ब्रह्मांड एक ही परम सत्य (ब्रह्म) का रूप है, और प्रत्येक जीव की आत्मा (आत्मन्) उसी ब्रह्म का अंश है। “तत्वमसि” (तू वही है) और “अहं ब्रह्मास्मि” (मैं ब्रह्म हूं) जैसे उपनिषद वाक्यों पर वे विशेष बल देते थे।
उनके अनुसार, माया (भ्रम) के कारण हम अलग-अलग दिखते हैं, लेकिन वास्तव में सब एक हैं। इस एकता की अनुभूति से ही मुक्ति संभव है। उन्होंने कहा था कि “हर इंसान के भीतर परमात्मा निवास करता है”, इसलिए आत्म-ज्ञान ही सच्चा धर्म है।
2. मानवतावाद और दरिद्र नारायण की सेवा
विवेकानंद एक सच्चे मानवतावादी थे। वे कहते थे कि “मनुष्य का जीवन ही धर्म है”। ईश्वर पुस्तकों या मंदिरों में नहीं, बल्कि दुखी, गरीब और पीड़ित मनुष्यों में बसता है।
उनका प्रसिद्ध कथन है: “मेरा ईश्वर दुखी, पीड़ित हर जाति का निर्धन मनुष्य है।”
वे दरिद्र नारायण की सेवा को ईश्वर की सच्ची पूजा मानते थे। सेवा, करुणा और मानवता की मदद उनके दर्शन का मूल था। रामकृष्ण मिशन की स्थापना इसी विचार से हुई, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा कार्य करता है।
3. धर्म की सार्वभौमिकता और सभी धर्मों की एकता
स्वामी विवेकानंद ने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। 1893 के शिकागो विश्व धर्म महासभा में उनके ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने कहा: “सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ हिंदू धर्म ने दुनिया को पढ़ाया है।”
वे मानते थे कि विभिन्न धर्म अलग-अलग रास्ते हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है—ईश्वर की प्राप्ति। उन्होंने सार्वभौमिक धर्म की बात की, जो मानवता पर आधारित हो। कोई भी धर्म श्रेष्ठ नहीं, सभी सत्य की ओर ले जाते हैं।
4. कर्म योग और निःस्वार्थ सेवा
गीता के कर्मवाद से प्रभावित होकर विवेकानंद ने कर्म योग पर विशेष बल दिया। वे कहते थे कि निःस्वार्थ कर्म ही जीवन का आधार है। व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और मानवता की भलाई के लिए कार्य करना चाहिए।
उनका विचार था: “शक्ति ही जीवन है, निर्बलता मृत्यु है।” युवाओं को उन्होंने कर्म, साहस और सेवा से राष्ट्र निर्माण का आह्वान किया।
5. आत्मविश्वास, शक्ति और युवा शक्ति
विवेकानंद युवाओं के प्रेरक थे। उनका प्रसिद्ध उद्घोष है: “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
वे कहते थे: “खुद पर विश्वास करो, और दुनिया आपके कदमों में होगी।”
उनके अनुसार, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति से ही व्यक्ति और राष्ट्र महान बनते हैं। उन्होंने भारतीय युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
6. शिक्षा का दर्शन: मनुष्य निर्माण
विवेकानंद की शिक्षा मनुष्य-निर्माण पर केंद्रित थी। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्म-विश्वास और सेवा-भावना विकसित करने वाली होनी चाहिए।
वे कहते थे कि शिक्षा “मैन-मेकिंग एजुकेशन” हो—जो व्यक्ति को मजबूत, नैतिक और देशभक्त बनाए। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और समाज के सभी वर्गों के उत्थान पर भी बल दिया।
7. राष्ट्रवाद और भारतीय गौरव
विवेकानंद का राष्ट्रवाद आध्यात्मिक था। वे भारत को पुण्यभूमि मानते थे और कहते थे कि भारत की प्राचीन संस्कृति विश्व को प्रकाश दे सकती है।
उन्होंने औपनिवेशिक काल में भारतीयों को आत्मसम्मान की दीक्षा दी और कहा कि “भारत एक बार फिर विश्व गुरु बनेगा।” उनका राष्ट्रवाद समावेशी था, जिसमें सभी धर्म और जातियां शामिल थीं।
स्वामी विवेकानंद का दर्शन आज भी प्रासंगिक है—यह आत्म-जागरण, सेवा, एकता और शक्ति का संदेश देता है। उनके विचार न केवल भारत, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। जैसा उन्होंने कहा: “एक विचार लो, उसे अपना जीवन बना लो।”

