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mother’s day; जीवन में मातृत्व की अनमोल भूमिका: माँ के बिना अधूरी है हर कहानी

अतुल्य भारत चेतना
वीरेंद्र यादव

सीपत। “जीवन में मातृत्व से अधिक महत्वपूर्ण कोई भूमिका नहीं है,” यह कहना है डिडनेश्वरी यादव का, जिनके शब्दों में माँ की महिमा और उनके योगदान की गहराई साफ झलकती है। मातृत्व न केवल एक रिश्ता है, बल्कि एक ऐसी शक्ति है जो समाज के निर्माण और व्यक्तित्व के विकास में आधारशिला का काम करती है। माँ अपने बच्चों के जीवन में पहली शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत होती है, जो निस्वार्थ भाव से उनकी हर जरूरत को पूरा करती है।

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डिडनेश्वरी यादव ने मातृत्व की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “एक आदर्श माँ बनने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन एक अच्छी माँ बनने के लाखों रास्ते हैं।” यह कथन माँ की उस लचीली और समर्पित भूमिका को दर्शाता है, जो हर परिस्थिति में अपने बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करती है। चाहे वह बच्चों की शिक्षा हो, संस्कारों का निर्माण हो, या उनके सपनों को पंख देना, माँ हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहती है।

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माँ का प्रभाव बच्चों के चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण में सबसे गहरा होता है। डिडनेश्वरी के अनुसार, “माँ अपने बच्चों को सहानुभूति और दया जैसे गुण सिखाती है। वह उन्हें दूसरों की भावनाओं को समझने और उनकी मदद करने की प्रेरणा देती है।” यह शिक्षा बच्चों को न केवल एक बेहतर इंसान बनाती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी मदद करती है। उदाहरण के तौर पर, एक माँ अपने बेटे को छोटी-छोटी चीजों में दूसरों की मदद करने का महत्व सिखाती है, जो आगे चलकर समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को बढ़ाता है।

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यह भी सच है कि माँ का प्यार और प्रभाव समय के साथ कभी कम नहीं होता। डिडनेश्वरी ने एक मार्मिक उद्धरण साझा किया, “एक आदमी अपनी प्रेमिका से सबसे अधिक प्यार करता है, अपनी पत्नी से सबसे ज्यादा, लेकिन अपनी माँ से सबसे अधिक समय तक।” यह कथन माँ के उस अनमोल रिश्ते को दर्शाता है, जो जीवन भर साथ रहता है।

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माँ न केवल बच्चों की जरूरतों का ख्याल रखती है, बल्कि उन्हें नैतिकता, अनुशासन और आत्मविश्वास जैसे मूल्यों से भी जोड़ती है। डिडनेश्वरी ने बताया कि उनकी माँ उनके लिए रोल मॉडल थीं, जिन्होंने उन्हें जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की ताकत दी। “मेरी माँ मेरी रोल मॉडल थीं, इससे पहले कि मैं यह भी जानता कि यह शब्द क्या है,” उन्होंने गर्व के साथ कहा।समाज में माँ की भूमिका को और गहराई से समझने के लिए यह जरूरी है कि हम उनकी आज्ञा का पालन करें और उनके प्रति सम्मान का भाव रखें। माँ के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। वह न केवल परिवार का आधार होती है, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। डिडनेश्वरी का मानना है कि माँ की शिक्षाएँ और उनका प्यार बच्चों को ऐसा इंसान बनाता है, जो न केवल अपने लिए, बल्कि दूसरों के लिए भी जीना सीखता है।

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इस मातृत्व दिवस के अवसर पर, डिडनेश्वरी यादव का यह संदेश हर किसी के लिए प्रेरणा है कि हम अपनी माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उनके बलिदानों को सम्मान दें। क्योंकि, जैसा कि वह कहती हैं, “माँ के बिना जीवन की हर कहानी अधूरी है।”

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News Desk

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