जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब श्रीकृष्ण अवतार लेते हैं -वैभव भारद्वाज
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
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डीग – डीग जिले के कस्बा कामां कामवन में बश्रीमद्भागवत सप्ताह के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनके प्रारंभिक लीलाओं का वर्णन किया गया जिसमें कंस के अत्याचारों से धरती को मुक्त कराने के लिए देवकी-वसुदेव के यहां उनका प्राकट्य, मथुरा जेल से गोकुल पहुंचना, माखन चोरी, और यशोदा मैया द्वारा बांधने की लीला (दामोदर लीला) सुनाई गयी ,जो भक्तों को प्रेम से भगवान से जुड़ने और आनंदित होने का संदेश देती है, साथ ही इसमें भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा का श्रवण भक्तों ने किया ,जो दान और भक्ति का महत्व सिखाती है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कृष्ण जन्म के प्रसंग शुरू होते ही पांडाल में मौजूद श्रद्धालु नंद के घर आनंद भया जय कन्हैया लाल की भजनों के साथ झूम उठे। वहीं श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर मक्खन मिश्री के प्रसाद का भोग लगाकर वितरित किया। मुरलीमनोहर कांवरिया मन्दिर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास वैभव भारद्वाज ने कहा कि जीवन में जब भी भगवत नाम सुनने का अवसर प्राप्त हो, उससे विमुख नहीं होना चाहिए। भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि जब जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब तब परमात्मा अवतार धारण करके धरती पर धर्म की स्थापना करते हैं।
व्यास ने कृष्ण जन्म की कथा के पूर्व भगवान राम के अवतार की लीला का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने आदर्श स्थापित किया है, वह आज भी प्रासंगिक है। राम जन्म, ताड़का वध, राम विवाह, वनवास, रावण वध सहित राम राज्याभिषेक पर सुन्दर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि द्वापर में जब कंस के अत्याचार बढ़े तो श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर मुक्ति दिलाई।

