अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 500 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने के बयान के बाद वैश्विक शेयर बाजार में अस्थिरता का दौर जारी है। इस अनिश्चित माहौल का सीधा असर उत्तराखंड के प्रमुख कारोबारी जिले ऊधमसिंह नगर पर भी देखने को मिल रहा है। जिले में बड़ी संख्या में कारोबारियों और निवेशकों का शेयर बाजार में निवेश फंसा हुआ है, जो मौजूदा हालात में जोखिम में आ गया है।
शेयर कारोबार से जुड़ी फर्मों के अनुसार, केवल काशीपुर क्षेत्र के ही 70 से 80 लोगों ने बड़े स्तर पर शेयर बाजार में निवेश कर रखा है। इनमें उद्योगपति, ज्वेलर्स, बड़े व छोटे व्यापारी, बैंक कर्मचारी और अन्य वर्गों के निवेशक शामिल हैं। काशीपुर क्षेत्र में करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश शेयर बाजार में लगा हुआ है, जबकि रुद्रपुर समेत पूरे ऊधमसिंह नगर जिले में यह आंकड़ा लगभग 300 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
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टैरिफ फैक्टर के चलते बाजार में आई अनिश्चितता और लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि फिलहाल हर वर्ग के निवेशक प्रभावित हैं, हालांकि बाजार में सुधार आने में कुछ समय लग सकता है। ऐसे में निवेशकों को घबराहट में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने और सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।
कोविड के बाद बढ़ा निवेश का रुझान
ऊधमसिंह नगर जिले में कोविडकाल के बाद शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ था। लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार छोटे और बड़े स्तर पर निवेश किया। लेकिन बीते कुछ महीनों से बाजार में जारी तेज उतार-चढ़ाव और हालिया गिरावट ने निवेशकों को नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते कई लोग फिलहाल नए निवेश से दूरी बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है और उन्हें अपना निवेश बनाए रखना चाहिए।
छोटे निवेशक सबसे ज्यादा प्रभावित
मौजूदा हालात में शेयर बाजार की उथल-पुथल का सबसे ज्यादा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। शेयर ट्रेडर मनीष कुमार बरेजा के अनुसार, सेंसेक्स में स्मॉल शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों को ज्यादा नुकसान हो रहा है, जबकि बड़े निवेशकों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम है। निफ्टी में फिलहाल स्थिति कुछ हद तक स्थिर बनी हुई है।
वहीं, शेयर बाजार एडवाइजर धीरज अग्रवाल का कहना है कि स्मॉल कैप फंड में निवेश करने वालों को इस समय नुकसान झेलना पड़ रहा है, जबकि बड़े शेयरों पर इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने निवेशकों को धैर्य रखने और घाटे में शेयर बेचने से बचने की सलाह दी है। उनके अनुसार, बाजार में कभी भी सुधार के संकेत मिल सकते हैं।

