पिपरिया में नाबालिग लड़की को लेकर फरार होने का सनसनीखेज मामला: आरोपी फरार, पुलिस पर लापरवाही का आरोप, पीड़िता की मां इंसाफ की लगा रही गुहार
अतुल्य भारत चेतना (विकास सियारिया)
पिपरिया (नर्मदा पुरम): मध्य प्रदेश के नर्मदा पुरम जिले के पिपरिया शहर में एक नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाने का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। शहर के इतवारा बाजार स्थित विनोबा वार्ड की निवासी नीतू धुर्वे की 15 वर्षीय बेटी निहारिका को एक युवक द्वारा अपहृत किए जाने की घटना ने स्थानीय समुदाय में हड़कंप मचा दिया है। आरोपी युवक, जिसका नाम आदर्श नागवंशी बताया जा रहा है, ने इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया है, जबकि पुलिस प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण पीड़िता की मां को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। घटना के 13-14 दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस पैसे या राजनीतिक दबाव के आगे झुक रही है?
घटना के विवरण के अनुसार, नीतू धुर्वे एक मजदूर महिला हैं, जो कड़ी मेहनत से अपना और परिवार का भरण-पोषण करती हैं। उनकी बेटी निहारिका, जो मात्र 15 वर्ष की नाबालिग है, को आरोपी आदर्श नागवंशी ने बहला-फुसलाकर या जबरन भगाकर ले जाने का प्रयास किया। यह घटना शहर के व्यस्त इलाके में हुई, जहां सुरक्षा व्यवस्था की कमी ने अपराधियों को बढ़ावा दिया। पीड़िता की मां ने तुरंत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार करने या लड़की को बरामद करने में कोई प्रगति नहीं हुई है। नीतू धुर्वे विभिन्न सरकारी कार्यालयों और पुलिस स्टेशनों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर जगह उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं शहर में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। पिपरिया जैसे छोटे शहर में अपराध की बढ़ती दर और पुलिस की सुस्ती ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पुलिस अगर समय पर कार्रवाई करती तो शायद लड़की अब तक घर लौट आती। लेकिन लगता है कि आरोपी के पीछे कोई ताकतवर लोग हैं, जो मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।”




पुलिस विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम गठित की गई है और आरोपी की तलाश जारी है। हालांकि, पीड़िता की मां का आरोप है कि पुलिस अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं और मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस पैसे की ताकत या नेताओं के प्रभाव में आकर काम कर रही है? या फिर यह प्रशासनिक विफलता का एक और उदाहरण है? अब देखना यह होगा कि इस समाचार के प्रकाशन के बाद पुलिस विभाग क्या कदम उठाता है और क्या पीड़िता को न्याय मिल पाता है।
नाबालिगों के अपहरण और यौन शोषण जैसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) और पॉस्को एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को अधिक सक्रिय और संवेदनशील होने की जरूरत है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है और पीड़िता की सुरक्षित वापसी के लिए अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं।
यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की कमी को भी रेखांकित करता है। उम्मीद है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर न्याय की प्रक्रिया शुरू होगी।

