खाद-बीज के बाद अब नीलगाय बनी किसानों का सिरदर्द
अतुल्य भारत चेतना (रेहान हुसैन)
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श्रावस्ती। जनपद के किसान पहले ही खाद और बीज की किल्लत से जूझ रहे हैं, ऊपर से अब नीलगायों का आतंक उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है। खेतों में खड़ी रबी फसलों पर नीलगायों के लगातार हमलों से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रात होते ही नीलगायों के झुंड खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों, चना समेत अन्य फसलों को चट कर जा रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों के किसानों का कहना है कि नीलगायों के डर से वे रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद फसलें पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं। कई गांवों में किसानों ने अपने स्तर पर खेतों के चारों ओर कांटेदार झाड़ियां लगाने, तारबंदी करने और शोर मचाने जैसे उपाय किए हैं, लेकिन नीलगायों पर इनका कोई खास असर नहीं दिख रहा।
किसानों का आरोप है कि फसल बर्बादी से उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। पहले खाद-बीज की महंगाई और समय पर उपलब्धता न मिलने से किसान परेशान थे, अब नीलगायों से होने वाला नुकसान उन्हें आर्थिक संकट की ओर धकेल रहा है। कई किसानों ने बताया कि यदि यही स्थिति रही तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि नीलगायों की बढ़ती समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में फसल नुकसान और भी बढ़ सकता है। वे चाहते हैं कि सरकार और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द राहत प्रदान करें, ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।

