अतुल्य भारत चेतना (संवाददाता)
लखनऊ: नव वर्ष के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ गोमती नगर केंद्र द्वारा एक प्रेरणादायक विशेष सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था “नव वर्ष की शुरुआत कैसे करें जिससे पूरा वर्ष खुशनुमा एवं श्रेष्ठ बने”। इस सभा का मुख्य उद्देश्य सकारात्मक सोच, आत्मिक सशक्तिकरण और राजयोग अभ्यास के माध्यम से जीवन में संतुलन, उत्साह तथा नवीनता का संचार करना रहा।

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कार्यक्रम की शुरुआत गोमती नगर केंद्र की संचालिका राजयोगिनी राधा दीदी ने की। उन्होंने सभी उपस्थित जनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रेष्ठ सोच से जीवन स्वतः श्रेष्ठ बन जाता है और इसके लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं होती। ब्रह्माकुमारीज़ परिवार में दिन की शुरुआत अच्छे विचारों, शुभ वचनों और योग से करने की शिक्षा दी जाती है, जिससे पूरा दिन सहज, सुखद तथा ऊर्जा से भरपूर बनता है।
राधा दीदी ने मन की तुलना सॉफ्टवेयर से करते हुए समझाया कि जैसे सॉफ्टवेयर वैसा ही हार्डवेयर कार्य करता है। यदि मन रूपी सॉफ्टवेयर में नकारात्मकता हो तो जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि मन रूपी मोबाइल में सकारात्मक विचारों के ऐप डाउनलोड करें, जिससे जीवन सरल, खुशनुमा और तनावमुक्त बन सके। “Forgive और Forget” को जीवन में अपनाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्व-परिवर्तन ही विश्व परिवर्तन का आधार है और नए समाज के निर्माण की शुरुआत स्वयं से होती है।


इसके बाद स्वर्णलता दीदी ने जीवन में नवीनता लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सोच और दृष्टिकोण में परिवर्तन से नई खुशियां और अवसर स्वतः प्रकट होने लगते हैं। उपस्थित जनों को राजयोग मेडिटेशन का प्रैक्टिकल अभ्यास कराया गया। उन्होंने बताया कि यह निःशुल्क आध्यात्मिक ज्ञान भारत सहित विदेशों में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ राजयोग केंद्रों पर उपलब्ध है। एक मनोरंजक आध्यात्मिक गतिविधि के माध्यम से भी प्रेरणादायक संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री अनिल सिंह (सदस्य, उत्तर प्रदेश एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल), श्री वीरेंद्र सिंह (रिटायर्ड डायरेक्टर, होम्योपैथिक कॉलेज) तथा डॉ. शैली महाजन (हेड, डेंटिस्ट्री विभाग, लोहिया हॉस्पिटल) उपस्थित रहे।

सभा के अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया तथा नव वर्ष को श्रेष्ठ संकल्पों, सकारात्मक सोच और आत्मिक सशक्तिकरण के साथ प्रारंभ करने का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम ने उपस्थित सभी लोगों को नव वर्ष में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।



राजयोग ध्यान के लाभ: विस्तार से समझें
राजयोग ध्यान, जिसे ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सिखाया जाता है, एक प्राचीन और सरल ध्यान विधि है। यह खुली आँखों से किया जाता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने पर आधारित है। यह कोई मंत्र-जाप या जटिल आसन नहीं, बल्कि आत्म-चेतना और सकारात्मक विचारों पर फोकस करता है। ब्रह्माकुमारीज़ के अनुसार, राजयोग सभी योगों का राजा है, क्योंकि यह मन, बुद्धि और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान करता है।

राजयोग ध्यान के प्रमुख लाभ
राजयोग का नियमित अभ्यास जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाता है। नीचे विस्तार से दिए गए हैं मुख्य लाभ:
- मानसिक शांति और तनाव मुक्ति राजयोग से मन शांत और स्थिर होता है। नकारात्मक विचार दूर होते हैं, चिंता और तनाव कम होता है। यह ध्यान परमात्मा से शक्ति प्राप्त करने का माध्यम है, जिससे व्यक्ति हर परिस्थिति में शांत रहता है। अध्ययनों में पाया गया है कि यह ध्यान स्ट्रेस हार्मोन को कम करता है और भावनात्मक स्थिरता बढ़ाता है।
- आत्मिक सशक्तिकरण और आत्मविश्वास यह ध्यान आत्मा को उसकी मूल गुणों (शांति, प्रेम, पवित्रता) से जोड़ता है। व्यक्ति स्वयं को शक्तिशाली महसूस करता है और जीवन की चुनौतियों का सामना आसानी से करता है। ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं में आठ शक्तियाँ (सहन करने की, समाने की आदि) प्राप्त होती हैं, जो निर्णय लेने और परिवर्तन करने में मदद करती हैं।
- एकाग्रता, स्मृति और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि मन की एकाग्रता बढ़ती है, याददाश्त मजबूत होती है। यह ध्यान मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, जिससे पढ़ाई, काम या दैनिक जीवन में फोकस बेहतर होता है। वैज्ञानिक शोधों में राजयोग करने वालों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और संज्ञानात्मक सुधार देखा गया है।
- शारीरिक स्वास्थ्य लाभ तनाव कम होने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है। हृदय रोग, डायबिटीज और अस्थमा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह ध्यान भावनात्मक नियंत्रण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

- सकारात्मक सोच और संबंधों में सुधार नकारात्मकता दूर होकर सकारात्मक विचार आते हैं। व्यक्ति क्षमाशील बनता है (“Forgive and Forget”), जिससे रिश्ते बेहतर होते हैं। यह विश्व परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करने की शिक्षा देता है।
- आध्यात्मिक विकास और जीवन में नवीनता परमात्मा से योग लगाने से शांति, प्रेम और शक्तियों का अनुभव होता है। जीवन में उद्देश्य और खुशी बढ़ती है। यह ध्यान किसी भी समय, कहीं भी किया जा सकता है, जो इसे व्यस्त जीवन के लिए आदर्श बनाता है।


राजयोग ध्यान न केवल व्यक्तिगत विकास करता है, बल्कि विश्व शांति में भी योगदान देता है। ब्रह्माकुमारीज़ केंद्रों पर यह निःशुल्क सिखाया जाता है। नियमित अभ्यास से ये लाभ गहराई से अनुभव होते हैं। यदि आप शुरू करना चाहें, तो निकटतम केंद्र से संपर्क करें या सरल कमेंट्री से शुरुआत करें।

