अतुल्य भारत चेतना संवाददाता खुमेश यादव
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मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन
नारायणपुर – कांकेर जिले के ग्राम बड़े तेवड़ा में आदिवासी समाज के लोगों पर हुए कथित सुनियोजित हमले, जबरन शव दफनाए जाने तथा इससे जुड़ी अवैध धर्मांतरण और मिशनरी गतिविधियों के विरोध में बुधवार को नारायणपुर नगर एक ऐतिहासिक जनआंदोलन का साक्षी बना। सर्व समाज के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में जिले के विभिन्न समाजों, वर्गों और समुदायों के हजारों महिला-पुरुषों ने भाग लेकर सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और न्याय की मांग को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
सुबह से ही नगर में असाधारण माहौल देखने को मिला। आंदोलन के समर्थन में व्यापारी संघ ने स्वेच्छा से बंद का आह्वान किया, जिसके चलते नारायणपुर की लगभग सभी दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, ठेले-खोमचे और फुटपाथी व्यवसाय पूरी तरह बंद रहे। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि यह बंद किसी राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के साथ एकजुटता और उनकी अस्मिता की रक्षा के समर्थन में लिया गया निर्णय है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बड़े तेवड़ा गांव में ईसाई मिशनरी समूहों एवं भीम आर्मी से जुड़े कुछ लोगों द्वारा आदिवासी समाज पर पूर्व नियोजित ढंग से हमला किया गया, जिसमें कई ग्रामीण घायल हुए। साथ ही मृतकों के शवों को पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के विपरीत जबरन दफनाए जाने की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में भय, आक्रोश और असुरक्षा का वातावरण निर्मित कर दिया है। समाज के लोगों ने इसे केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि आदिवासी आस्था, सनातन परंपराओं और सामाजिक गरिमा पर सीधा प्रहार बताया।
नगर के साप्ताहिक बाजार स्थल पर आयोजित विशाल जनसभा में सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक रूपसाय सलाम सहित अनेक प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभा को अध्यक्ष जिला पंचायत नारायण मरकाम, मंगऊ कावडे, गुलाब बघेल, नारायण साहु सहित अन्य सामाजिक, पारंपरिक और सनातन समाज के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता देता है, किंतु प्रलोभन, भय, दबाव अथवा छलपूर्वक कराया गया धर्मांतरण न केवल गैरकानूनी है, बल्कि समाज को विभाजित करने वाला कृत्य भी है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा कार्यों की आड़ में लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में मिशनरी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं,देवी-देवताओं और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो सामाजिक तनाव और टकराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सभा के पश्चात हजारों की संख्या में महिला-पुरुष अनुशासित ढंग से रैली के रूप में नगर भ्रमण पर निकले। “सनातन समाज एक है”, “अवैध धर्मांतरण बंद करो”, “आदिवासी समाज पर अत्याचार बंद करो” और “दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करो” जैसे नारों से पूरा नगर गूंज उठा। रैली में युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
रैली का समापन क्रीड़ा परिसर मैदान के सामने हुआ, जहां प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम का विस्तृत ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर डॉ. सुमित गर्ग को सौंपा। ज्ञापन में बड़े तेवड़ा की घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, घायलों को समुचित उपचार एवं मुआवजा, तथा जिले सहित पूरे क्षेत्र में अवैध धर्मांतरण और संदिग्ध मिशनरी गतिविधियों पर सख्त रोक लगाने की मांग की गई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि बड़े तेवड़ा की घटना कोई अपवाद नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न आदिवासी अंचलों में घट रही ऐसी घटनाओं की कड़ी है। इसमें राज्य में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम को सख्ती से लागू करने, कथित पक्षपातपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने तथा निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।डिप्टी कलेक्टर डॉ. सुमित गर्ग ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि सभी बिंदुओं को शासन तक पहुंचाया जाएगा और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।पूरे कार्यक्रम के दौरान आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, किंतु समाज का संदेश स्पष्ट और दृढ़ था। सर्व समाज ने कहा कि यह विरोध किसी समुदाय विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान, कानून के शासन, जनजातीय आस्था और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए है। यह जनआंदोलन आदिवासी अस्मिता और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए समाज की संगठित शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा।

