Breaking
Mon. Jan 12th, 2026

भरतपुर के लाल की 14.20 लाख की बोली ,कार्तिक की कहानी पिता की जुबानी..

भरतपुर के लाल की 14.20 लाख की बोली ,कार्तिक की कहानी पिता की जुबानी..

संवाददाता धुर्व अग्रवाल भरतपुर

भरतपुर। जब पिता के सपने को पूरा करने के लिए बेटा दिन रात मेहनत कर सफलता की उड़ान भरता है, तो पिता के लिए इससे बड़ी कोई खुशी नहीं हुई। भरतपुर के दारापुर गांव के पिता पुत्र की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यहां एक पिता का क्रिकेटर बनने का अधूरा सपना बेटे की शानदार सफलता बनकर सामने आया है। 19 साल के कार्तिक शर्मा को आईपीएल-2026 के मिनी ऑक्शन में चेन्नई सुपर किंग्स ने 14.20 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया। यह रकम न सिर्फ कार्तिक की प्रतिभा की कीमत है, बल्कि उनके पिता मनोज शर्मा के वर्षों के त्याग, संघर्ष और जिद की जीत भी है। दरअसल, मनोज शर्मा खुद कभी एक मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे। वे मैदान पर अपनी पहचान बनाने की राह पर थे, लेकिन कंधे की गंभीर चोट ने उनका करियर समय से पहले खत्म कर दिया। लेकिन सपनों के टूटने का दर्द उन्हें तोड़ नहीं सका। बल्कि, उन्होंने ठान लिया कि जो मुकाम उन्हें नहीं मिला, वह उनके बच्चे जरूर हासिल करेंगे, चाहे बेटा हो या बेटी। मनोज बताते हैं कि “मैंने कभी हार नहीं मानी। मैंने सोचा कि मेरा अधूरा सपना मेरा बच्चा पूरा करेगा।” आईपीएल ऑक्शन में करोड़पति बनने के बाद बुधवार को कार्तिक शर्मा अपने माता पिता के साथ भरतपुर पहुंचे। पिता मनोज ने बताया कि कार्तिक महज ढाई साल के थे, जब उन्होंने उनके हाथ में बल्ला थमा दिया। घर का आंगन ही उनका पहला क्रिकेट मैदान बना। करीब पांच साल तक कार्तिक ने घर पर ही पिता से बुनियादी ट्रेनिंग ली। मनोज शर्मा कहते हैं कि छोटी उम्र में ही कार्तिक की समझ और तकनीक ऐसी थी कि हर कोई हैरान रह जाता था। मनोज खुद घंटों गेंदबाजी करते और बेटे को क्रिकेट की बारीकियां सिखाते थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती ट्रेनिंग के बाद कार्तिक को भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के पास भेजा गया। कुछ समय बाद बेहतर कोचिंग के लिए परिवार ने बड़ा फैसला लिया और कार्तिक को आगरा ले गए। वहां भारतीय क्रिकेट टीम के ऑल राउंडर दीपक चाहर के पिता लोकेंद्र सिंह चाहर की अकादमी में उन्हें बेहतर माहौल और कोचिंग मिली। मनोज शर्मा ने बताया कि कार्तिक की पावर हिटिंग और लंबे छक्के मारने की कला यहां निखरी। वे इंग्लैंड के महान बल्लेबाज केविन पीटरसन जैसे शॉट्स लगाने के लिए मशहूर हो गए। कार्तिक विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और घरेलू क्रिकेट में तूफानी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनका स्ट्राइक रेट 160 से ऊपर रहा। राजस्थान की अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 टीमों में खेल चुके कार्तिक अब सीएसके में महेंद्र सिंह धोनी के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करेंगे। पिता मनोज शर्मा बताते हैं कि कार्तिक को इस मुकाम तक पहुंचाने का सफर आसान नहीं था। वे प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाकर परिवार चलाते थे, लेकिन जब बेटे की प्रैक्टिस प्रभावित होने लगी तो उन्होंने ट्यूशन भी छोड़ दी। क्रिकेट किट, ट्रेनिंग और यात्रा के खर्च के लिए उन्होंने अपनी जमीन और दुकान तक बेच दी। यहां तक कि 27-28 लाख रुपये का कर्ज भी लेना पड़ा। मां ने भी गहने बेचकर मदद की। मनोज ने बताया कि घर बाबा की पेंशन से चलता था। मनोज के तीन बेटे हैं, जिनमें से दो क्रिकेट खेलते हैं। वे कहते हैं, “मेरा सपना है कि मेरे बेटे देश के लिए खेलें और भारत का नाम रोशन करें।” वहीं कार्तिक ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस मुकाम के असली हकदार मेरे माता-पिता हैं। उनके विश्वास और बलिदान ने मुझे यहां पहुंचाया। अब उनका सपना आईपीएल से आगे भारतीय टीम तक पहुंचने का है। युवाओं के लिए उनका संदेश साफ है, “मेहनत और अनुशासन से कोई सपना असंभव नहीं।” पिता के अधूरे सपने को अपनी मेहनत से पूरा करके कार्तिक ने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकती।

Author Photo

मनमोहन गुप्ता

Responsive Ad Your Ad Alt Text
Responsive Ad Your Ad Alt Text

Related Post

Responsive Ad Your Ad Alt Text