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Sun. Jan 11th, 2026

क्यों राजस्थान में एम्बुलेंस बन रही है मौत का कारण; आखिर कौनसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है स्वास्थ्य विभाग?

संवाददाता: जितेन्द्र कुमार
अतुल्य भारत चेतना

जयपुर/राजस्थान: राजस्थान में लापरवाही के कारण एक दिन के नवजात की मौत होने की खबर सामने आई है। सांस लेने में तकलीफ होने के कारण नवजात को जयपुर रेफर किया गया था। उसे एंबुलेंस से ले जाया जा रहा था। रास्ते में ऑक्सीजन खत्म होने से उसकी मौत हो गई।
जयपुर के एक सरकारी अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में एक दिन के नवजात शिशु की मौत हो गई। बच्चे के पिता का दावा है कि ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया था और ड्राइवर उन्हें किसी अन्य अस्पताल में छोड़कर चला गया।

बस्सी थाने के एसएचओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि यह घटना शुक्रवार शाम को बस्सी के पास हुई। सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहे नवजात शिशु को भरतपुर जिले के बयाना अस्पताल से एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया था। उसके पिता और चाचा उसे निजी एंबुलेंस से ले जा रहे थे। एसएचओ ने बताया कि पिता के अनुसार, ऑक्सीजन खत्म होने के बाद एंबुलेंस चालक उन्हें बस्सी सरकारी अस्पताल में छोड़कर चला गया।

एसएचओ ने आगे बताया कि बांसखो के पास पिता ने देखा कि ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया है। इसके बाद एम्बुलेंस चालक पास के बस्सी अस्पताल गया, जहां डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। एम्बुलेंस में कोई नर्सिंग स्टाफ नहीं था और ऑक्सीजन सिलेंडर पिता द्वारा ही चलाया जा रहा था। एसएचओ ने बताया कि शव के साथ नवजात के पिता भरतपुर के लिए रवाना हो गए। इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाली घटना है यह ।
प्रतिदिन आते है 500 से अधिक मरीज

एसएमएस अस्पताल की बात करें तो ट्रोमा सेंटर में प्रतिदिन औसतन 500 मरीज इमरजेंसी में इलाज के लिए आते है। इनमें से 50 से 60 मरीज तो गंभीर स्थिति में डायरेक्ट या दूसरे अस्पतालों से रैफर होकर आते है।
आपातकालीन स्थिति में मरीजों को सुरक्षित सेवाएं मिल सकें, स्वास्थ्य विभाग इस पर पहल करें, अन्यथा आए दिन इस प्रकार की घटना होती रहेगी और कई जाने जाते रहेगी।
एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर अनिवार्य हो। जयपुर में 1023 में से 837 बिना सिलेंडर की चल रही है एंबुलेंस, मनमानी किराया वसूले जा रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि आरटीओ से किराया तय फिर भी मनमर्जी से वसूली जाती है।और सही से जिम्मेदारी भी नहीं उठा पा रहे हैं।

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News Desk

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