शहडोल – ठंड के दिनो में नवम्बर माह से विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन जिले में होने लगता है। जिले के व्यौहारी जनपद मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर बनास नदी का प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय सौंदर्य विदेशी मेहमानों को खूब भाता है। हर साल की तरह इस वर्ष भी बनास नदी के तटों पर उत्तरी गोलार्द्ध और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। नदी के किनारे इन विदेशी मेहमानों के कलरव से एक बार फिर रौनक लौट आई है। स्थानीय लोगों एवं प्रकृति तथा पर्यावरण प्रेमियों में इन मेहमानों के आने से उत्साह का माहौल है।
विदेशों के आने वाले प्रवासी पक्षियों में कोमारेन्ट, और चक्रवाक पक्षी प्रमुख हैं। इन पक्षियों को स्थानीय भाषा में ब्राम्हणी बतख भी कहा जाता है। इन प्रवासी पक्षियों विशेषकर चक्रवाक का उल्लेख हमारे प्राचीन भारतीय साहित्य और संस्कृति मे भी मिलता है। महाकवि कालिदास ने अपनी अमर रचनाओ में चक्रवाक (चकई-चकवा) के प्रेम और वियोग का वर्णन किया है। आदि संकराचार्य द्वारा रचित नर्मदा अष्ठक में भी इन पक्षियों को चक्रवाक पक्षी के रूप में याद किया गया है।
प्रवासी पक्षियों का विशेष जमावड़ा बनास नदी के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर कारी गोरी घाट और हथवार गांव के आस-पास रहता है। पर्यावरण विद रामकेश पटेल ने इन विदेशी मेहमानों के आगमन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इन पक्षियों के आने से बनास नदी का तट समोहिक हो गया है। उन्होंने बताया कि ये प्रवासी पक्षी अक्टूबर से नवम्बर के बीच मध्य एसिया के ठंडे मौसम से बचने के लिए यहां आते हैं। मार्च से अप्रैल तक बनास नदी को अपना अस्थायी घर बनाकर रहते हैं। स्थानीय पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी कार्यकर्ताओं ने प्रवासी पक्षियों को किसी भी प्रकार की हानि पहुंचाए बिना इनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखने में सहयोग की अपील की है।
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