अतुल्य भारत चेतना
सुरेश कुमार चौधरी
टीकमगढ़। निकटवर्ती ग्राम लार में जैन परिवार ने बेटी के जन्म को उत्सव का रूप देकर समाज में एक अनूठा संदेश दिया। शिक्षक दिनेश जैन के घर प्रथम संतान के रूप में कन्या रत्न के जन्म लेने पर परिवार ने धूमधाम से जश्न मनाया। ‘बेटी बचाओ’ मुहिम को सशक्त बनाते हुए बेटी का गृह प्रवेश आतिशबाजी, ढोल-ताशों की धुन और फूलों की सजावट के साथ किया गया। इस अनोखे स्वागत ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया और हर कोई जैन परिवार की सराहना कर रहा है।
भव्य स्वागत: घर को फूलों से सजाया, आतिशबाजी से रोशन
जैन परिवार ने बेटी के घर आगमन को यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी:
इसे भी पढ़ें : Shiv Mandir Lucknow; लखनऊ स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर और उनकी महिमा
- घर की सजावट: पूरे घर को ताजे फूलों से सजाया गया।
- संगीत और उत्सव: ढोल-ताशों की धुन पर नन्ही परी का गृह प्रवेश कराया गया।
- आतिशबाजी: कन्या के घर पहुंचते ही भव्य आतिशबाजी की गई, जिसने रात को दिन में बदल दिया।
- परिवार की अगुवाई: परिवार के सभी सदस्यों ने बेटी की अगुवाई में भव्य स्वागत किया।

इसे भी पढ़ें (Read Also): मथुरा रिफाइनरी के पूर्व ईडी बने इंडियन ऑयल के निदेशक रिफाइनरीज़
यह नजारा देखकर राहगीर और ग्रामीण देखते ही रह गए। नगर में बेटी के इस तरह के स्वागत की चर्चा हर तरफ है।
बेटी को बेटों के बराबर सम्मान: दादा जी का संदेश
नन्ही परी के दादा डॉक्टर अरविंद जैन ने कहा:
“बेटियों को समाज में बेटों के बराबरी का मान-सम्मान देना चाहिए।”
इसे भी पढ़ें : ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हिना खान बनीं कोरिया टूरिज्म की ब्रांड एंबेसडर
उन्होंने बताया कि परिवार में प्रथम संतान के रूप में बेटी का जन्म होना सौभाग्य की बात है। इस जश्न के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि बेटी किसी से कम नहीं है।
शिक्षक दिनेश जैन का सराहनीय कदम
लार निवासी शिक्षक दिनेश जैन के घर कन्या के जन्म से खुशियां दोगुनी हो गईं। उन्होंने बेटी को ‘लाड़ली लक्ष्मी’ का दर्जा देते हुए गृह प्रवेश को उत्सव का रूप दिया। यह आयोजन न केवल परिवारिक खुशी का प्रतीक बना, बल्कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बना।
समाज में सकारात्मक संदेश
जैन परिवार के इस अनोखे अंदाज में गृह प्रवेश की हर तरफ तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजन समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और आदर का भाव जागृत करते हैं। नन्ही परी के प्रथम घर आगमन पर जैन परिवार ने एक बार फिर साबित किया कि बेटी जन्म नहीं, वरदान है।

