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Chhindwara news; जन्मदिन नहीं, जनसेवा का दिन: महापौर विक्रम आहके ने मां के नाम लगाया आंवले का पौधा, बच्चों की मदद के लिए रखी दानपेटी

अतुल्य भारत चेतना
डॉ. मीरा पराड़कर

छिंदवाड़ा। जन्मदिन को आमतौर पर उत्सव और जश्न के रूप में मनाया जाता है, लेकिन छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम आहके ने अपने जन्मदिन को सेवा और संवेदना का दिन बना दिया। जहां अन्य जगहों पर केक और मोमबत्तियां होती हैं, वहीं विक्रम भैया के निवास पर मां के नाम से आंवले का पौधा लगाया गया और नागपुर में इलाजरत बच्चों की मदद के लिए एक दानपेटी रखी गई। इस अनोखी पहल ने शहर में मानवता और करुणा का संदेश फैलाया, जो हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

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जन्मदिन का अनोखा उत्सव: सेवा और संवेदना का प्रतीक

महापौर विक्रम आहके ने इस वर्ष अपने जन्मदिन को पारंपरिक जश्न से अलग हटकर जनसेवा के रूप में मनाया। उनके निवास पर कोई पार्टी या केक कटिंग नहीं हुई, बल्कि कार्तिक माह के पावन अवसर पर मां के नाम से आंवले का पौधा लगाया गया। आंवले का यह वृक्ष न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। आंवला मातृत्व, आशीर्वाद और जीवनदायिनी भावना का प्रतीक माना जाता है, जो विक्रम भैया की मां के प्रति उनकी श्रद्धा को दर्शाता है।

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महापौर ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा, “मेरे लिए जन्मदिन का अर्थ केवल जश्न नहीं, बल्कि किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाना है। अगर मेरी उम्र का हर साल किसी बच्चे की जिंदगी में उम्मीद की एक किरण जला सके, तो वही मेरे लिए सच्चा उपहार है।” उनकी यह बातें उपस्थित लोगों के दिलों को छू गईं और कार्यक्रम में एक गहरी भावनात्मक अनुभूति का माहौल बना।

दानपेटी की पहल: नागपुर के बच्चों के लिए सहायता

जन्मदिन के अवसर पर विक्रम भैया ने केक काटने की बजाय अपने निवास पर एक दानपेटी रखी, जिसमें आने वाली राशि नागपुर में इलाजरत बच्चों की मदद के लिए भेजी जाएगी। यह निर्णय पूरे शहर में संवेदना की मिसाल बन गया है। दानपेटी के माध्यम से एकत्रित धनराशि से उन बच्चों को सहायता मिलेगी, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। महापौर ने इस पहल से यह संदेश दिया कि जन्मदिन का असली उत्सव तब होता है, जब वह किसी जरूरतमंद की जिंदगी में मुस्कान बन जाए।

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यह कदम न केवल व्यक्तिगत स्तर पर प्रेरणादायक है, बल्कि समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देने वाला भी है। विक्रम भैया ने कहा कि यह पहल उनकी मां की सिखाई गई करुणा और मानवता के मूल्यों से प्रेरित है, जो उन्हें हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करती रही हैं।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति: शहर की संस्थाओं का सहयोग

कार्यक्रम में शहर की कई प्रमुख संस्थाओं और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने विक्रम भैया की इस संवेदनशील पहल की सराहना की और बच्चों की सहायता में सहयोग का आश्वासन दिया। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:

  • मॉडल फ्यूचर संस्था से आयशा लोधी।
  • आदर्श फाउंडेशन से डॉ. महेश बंदेवार और संरक्षक वृक्ष मित्र कुशवाहा जी।
  • तर्बियत वर्ल्ड परिवार से मोहम्मद इस्माइल कुरेशी।
  • मानव अधिकार मिशन से शैलेंद्र उजवने।
  • एक्सीलेंस शिक्षण समिति से पल्लवी और स्वाति।
  • हमारा संकल्प वेलफेयर सोसाइटी से डॉ. नरेंद्र सोमकुंवर और अलका नीरज शुक्ला।
  • डॉ. मीरा पराड़कर और धीरज राऊत सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक।

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इन सभी ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और विक्रम भैया के जनसेवा संकल्प को मजबूत करने में योगदान दिया। उपस्थित लोगों ने मां के नाम पर लगाए गए पौधे को प्रेम और करुणा का प्रतीक बताते हुए सराहना की, जबकि दानपेटी को जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी में नई रोशनी का माध्यम कहा।

कार्यक्रम का महत्व और संदेश

यह आयोजन छिंदवाड़ा शहर के लिए एक मिसाल बन गया है, जहां जन्मदिन जैसे व्यक्तिगत अवसर को सामाजिक सेवा से जोड़ा गया। आंवले का पौधा पर्यावरण संरक्षण और मातृ-प्रेम का प्रतीक बना, वहीं दानपेटी ने मानवता की भावना को मजबूत किया। विक्रम भैया की यह पहल युवाओं और समाजसेवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो दर्शाती है कि छोटे-छोटे कदम से बड़ी बदलाव लाए जा सकते हैं।

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News Desk

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