अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी
मंगलोरा। उत्तर प्रदेश से हरियाणा की ओर जा रही मुंजी धान (पैडी) की ढुलाई पर अचानक रोक लगा दी गई है, जिससे मंगलोरा चौकी के पास वाहनों की लंबी कतार लग गई है। 8 अक्टूबर 2025 से लागू इस रोक के कारण चौकी से लेकर 1 किलोमीटर तक ट्रकों का जाम लग रहा है, और ड्राइवरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चौकी प्रभारी ने बताया कि डीसी (डिप्टी कमिश्नर) के निर्देश पर अवैध धान की ढुलाई रोक दी गई है, लेकिन जांच में पता चला कि कोई आधिकारिक आदेश ऊपर से नहीं है, सिर्फ स्थानीय अधिकारियों के मौखिक निर्देश हैं। इस फैसले का उद्देश्य हरियाणा के किसानों को मंडियों में अच्छा भाव दिलाना बताया जा रहा है, लेकिन इससे यूपी के व्यापारियों और ड्राइवरों में असंतोष फैल गया है।
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रोक का कारण: अवैध ढुलाई पर सख्ती, लेकिन दस्तावेजों की मांग
मंगलोरा चौकी प्रभारी ने बताया कि परसों (8 अक्टूबर) डीसी साहब का दौरा हुआ था, जिसमें उन्होंने अवैध तरीके से धान ले जा रहे वाहनों पर रोक लगाने के निर्देश दिए। प्रभारी के अनुसार, “जो लोग बिना पक्के कागजात के धान ले जा रहे हैं, उन्हें हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केवल वैध दस्तावेज वाले वाहनों को ही जाने की अनुमति मिलेगी।” इस नीति का मकसद हरियाणा के किसानों की रक्षा करना है, क्योंकि यूपी से आने वाली सस्ती धान के कारण स्थानीय मंडियों में भाव गिर जाते हैं, और हरियाणा के किसान परेशान रहते हैं।

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हालांकि, जब मामले की गहराई से जांच की गई तो पता चला कि कोई लिखित या आधिकारिक आदेश ऊपर से नहीं आया है। यह सिर्फ स्थानीय अधिकारियों के मौखिक निर्देशों पर आधारित है। एक स्थानीय सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कोई सरकारी नोटिफिकेशन या गजट नहीं है जो यूपी की धान पर रोक लगाए। यह फैसला स्थानीय स्तर पर लिया गया लगता है, शायद हरियाणा किसानों के दबाव में।”
जाम और ड्राइवरों की परेशानी: बाहर से आने वालों को नहीं पता
रोक के कारण मंगलोरा चौकी पर रोजाना 1 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग रही है। बाहर से आने वाले ड्राइवरों को इस फैसले की जानकारी नहीं होने से वे अचानक रुक जाते हैं और घंटों इंतजार करना पड़ता है। एक ट्रक ड्राइवर ने बताया, “हम यूपी से धान लेकर हरियाणा जा रहे थे, लेकिन यहां रोक दिया गया। हमें बताया गया कि डीसी साहब का ऑर्डर है कि यूपी की धान नहीं जाने देंगे। हमारे पास तो सभी कागजात हैं, फिर भी चेकिंग में देरी हो रही है।”
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दूसरे ड्राइवर ने शिकायत करते हुए कहा, “हमें हरियाणा नहीं जाने दे रहे क्योंकि उनके किसानों को मंडी में अच्छा भाव नहीं मिलता। लेकिन हमारी क्या गलती? हम तो सिर्फ माल ढो रहे हैं। जाम में फंसकर समय और पैसे दोनों बर्बाद हो रहे हैं।” कई ड्राइवरों ने बताया कि वे दूर-दराज से आए हैं और इस रोक की वजह से वापस लौटना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान होगा। चौकी के आसपास की सड़क पर ट्रकों की कतार देखी जा सकती है, जो यातायात को भी प्रभावित कर रही है।
हरियाणा किसानों की समस्या: सस्ती धान से गिरते भाव
फैसले के पीछे का मुख्य कारण हरियाणा के किसानों की शिकायत है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यूपी से आने वाली मुंजी धान (जो अपेक्षाकृत सस्ती होती है) मंडियों में बाढ़ ला देती है, जिससे उनके उत्पादों को उचित मूल्य नहीं मिलता। एक हरियाणा किसान ने कहा, “हमारी धान की क्वालिटी अच्छी है, लेकिन बाहर से आने वाली सस्ती धान के कारण बाजार में दाम गिर जाते हैं। हम परेशान रहते हैं, इसलिए रोक लगाना जरूरी था।”

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हालांकि, यूपी के व्यापारियों का तर्क है कि यह व्यापार की स्वतंत्रता पर रोक है। वे कहते हैं कि अगर दस्तावेज वैध हैं तो ढुलाई क्यों रोकी जा रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराज्यीय व्यापार पर प्रभाव डाल सकता है और कानूनी चुनौतियां पैदा कर सकता है, क्योंकि बिना आधिकारिक आदेश के ऐसी रोक वैध नहीं मानी जा सकती।
प्रशासन की भूमिका और आगे की संभावनाएं
मंगलोरा चौकी प्रभारी ने स्पष्ट किया कि यह रोक अवैध ढुलाई पर है, न कि सभी धान पर। लेकिन व्यावहारिक रूप से सभी वाहनों की सख्त चेकिंग हो रही है, जिससे जाम की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि किसानों के हित में यह कदम उठाया गया है, लेकिन कोई लिखित आदेश दिखाने से इनकार कर दिया।
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इस घटना ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। यूपी के किसान और व्यापारी संगठनों ने विरोध जताया है और मांग की है कि अगर कोई रोक है तो आधिकारिक रूप से घोषित की जाए। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन की धमकी भी दी जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही उच्च स्तर से हस्तक्षेप होगा और समस्या का समाधान निकलेगा, ताकि व्यापार सुचारू रूप से चल सके और ड्राइवरों की परेशानी कम हो।

