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Chhattisgarh news; डॉ. हेडगेवार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : सनातन संस्कृति की रक्षा में अद्वितीय योगदान

अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप

 छत्तीसगढ़। हिंदू धर्म, जिसे सनातन धर्म कहा जाता है, विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। सनातन अर्थात सृष्टि के अभ्युदय काल से चला आ रहा धर्म। समय-समय पर अनेक धर्म और संस्कृतियां धरती पर जन्मीं और लुप्त भी हो गईं, लेकिन सनातन धर्म आज भी अमर और प्रासंगिक है। इसका प्रमुख कारण है कि इस भूमि पर समय-समय पर महापुरुषों ने अवतार लेकर धर्म और संस्कृति की रक्षा की।

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इन्हीं महापुरुषों की श्रृंखला में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का नाम विशेष महत्व रखता है। उन्होंने न केवल हिंदू समाज को नई चेतना दी, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना कर सनातन संस्कृति को पुनः सशक्त स्वरूप प्रदान किया।

संघ की स्थापना और उद्देश्य

सन 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। यह वही पावन दिन था जब त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने असत्य और अन्याय के प्रतीक रावण का वध किया था तथा विक्रमादित्य ने शकों को परास्त कर हिंदू धर्म की रक्षा की थी। इस ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में संघ की स्थापना ने हिंदू संस्कृति को जीवित रखने का संकल्प लिया।

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डॉ. हेडगेवार ने उस समय संघ की नींव रखी जब हिंदू समाज अपने ही अस्तित्व को भूलता जा रहा था। कम्युनिस्ट विचारधारा और पाश्चात्य प्रभाव के चलते लोग स्वयं को हिंदू कहने में भी संकोच महसूस करते थे। ऐसे में संघ ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद किया और हिंदू समाज को आत्मगौरव का बोध कराया।

हिंदू संस्कृति का पुनर्जागरण

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भी जब भारतीय समाज सांस्कृतिक रूप से विखंडन का शिकार था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एकता, अनुशासन और संगठन की शक्ति से समाज को जोड़े रखा। यदि डॉ. हेडगेवार और उनका संघ नहीं होते तो शायद हिंदू संस्कृति विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुकी होती।

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आज संघ एक वटवृक्ष के समान है जिसकी शाखाएँ न केवल भारत के हर कोने में फैली हुई हैं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का परचम लहरा रही हैं। यह संगठन करोड़ों स्वयंसेवकों के माध्यम से समाजहित, राष्ट्रहित और संस्कृति संरक्षण के कार्य कर रहा है।

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संघ की सौ वर्षीय यात्रा

27 मार्च 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी शताब्दी वर्षगांठ मनाने जा रहा है। यह 100 वर्षों की वह यात्रा है जिसमें संघ ने समाज के हर वर्ग तक पहुँचकर सेवा, शिक्षा, संगठन और सांस्कृतिक चेतना का दीप प्रज्वलित किया है।

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News Desk

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