अतुल्य भारत चेतना
अखिल सुर्यवंशी
छिंदवाड़ा। धर्म, धरा, धेनु, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित संस्था आदर्श फाउंडेशन छिंदवाड़ा ने दिशा योगा क्लास के सहयोग से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर साईं शक्ति विहार कॉलोनी (वार्ड नंबर 22) में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर धन्वंतरि वाटिका का निर्माण किया गया, जिसमें औषधीय गुणों वाले विभिन्न पौधों का रोपण हुआ। कार्यक्रम में संगोष्ठी, पौधारोपण, औषधीय पौधों का वितरण और इनकी उपयोगिता पर जानकारी साझा की गई, जिससे प्रतिभागियों में प्रकृति संरक्षण और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ी।
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कार्यक्रम का उद्देश्य और गतिविधियां
आदर्श फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. महेश बंदेवार ने बताया कि यह आयोजन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था। उन्होंने कहा कि संस्था पिछले कई वर्षों से प्रकृति और पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय है, और इस प्रकार के कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियां संपन्न हुईं:

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- आयुर्वेद दिवस पर संगोष्ठी: विशेषज्ञों द्वारा आयुर्वेद की महत्वता और दैनिक जीवन में इसके अनुप्रयोग पर चर्चा की गई।
- पौधारोपण: औषधीय पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
- औषधीय पौधों का वितरण: उपस्थित लोगों को औषधीय पौधे वितरित किए गए, ताकि वे इन्हें अपने घरों में लगा सकें।
- धन्वंतरि वाटिका का निर्माण: आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि के नाम पर एक विशेष वाटिका का निर्माण किया गया, जिसमें विभिन्न औषधीय पौधे लगाए गए।
- औषधीय पौधों की जानकारी साझा: विशेषज्ञों ने पौधों के गुणों और विभिन्न बीमारियों में उनके उपयोग पर विस्तार से बताया।
वक्ताओं के उद्बोधन
कार्यक्रम में प्रकृति उपासक और परिक्रमा वासी श्री रविकांत शास्त्री ने प्रकृति संवाद प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “हमें अपने जीवन को प्रकृति केंद्रित बनाना चाहिए, जिससे हम बीमारियों से दूर रह सकें। जिसका जीवन प्रकृति पर निर्भर है, वह स्वस्थ रहता है और बार-बार बीमार नहीं पड़ता। अधिकतर बीमारियां हमारी दिनचर्या के कारण होती हैं। हमें अपने आसपास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं करना चाहिए, बल्कि जीवनदायिनी नदियों का संरक्षण करना चाहिए।”他们的 वक्तव्य ने उपस्थित लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित किया।
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वृक्ष मित्र रविंद्र ने पौधों के औषधीय गुणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगाए गए पौधे विभिन्न बीमारियों में कैसे उपयोगी हैं, जैसे कि इम्यूनिटी बढ़ाने, तनाव कम करने और सामान्य स्वास्थ्य सुधार में। जन अभियान परिषद छिंदवाड़ा की परामर्शदाता लता नागले ने अपने संबोधन में कहा, “हमें अपने जीवन में एक पेड़ अपनी मां के नाम पर अवश्य लगाना चाहिए और उसे संरक्षित रखने की शपथ लेनी चाहिए। यह न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन प्रदान करेगा।”

धन्वंतरि वाटिका में लगाए गए पौधे
धन्वंतरि वाटिका का निर्माण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें निम्नलिखित औषधीय गुण वाले पौधों का रोपण किया गया:
- आंवला (इम्यूनिटी बूस्टर और विटामिन सी का स्रोत)
- अश्वगंधा (तनाव और थकान दूर करने में उपयोगी)
- तुलसी (श्वसन संबंधी समस्याओं और इम्यूनिटी के लिए)
- नीम (त्वचा रोग और एंटी-बैक्टीरियल गुणों वाला)
- शतावर (महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी)
- मुश्ली (शारीरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक)
- पत्थरचट्टा (घाव भरने और पाचन में उपयोगी)
- करंज (त्वचा और कीटाणुनाशक गुणों वाला)
ये पौधे न केवल औषधीय महत्व रखते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन में भी योगदान देंगे।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवी, योगा विशेषज्ञ और स्थानीय निवासी शामिल हुए। प्रमुख उपस्थितियों में शामिल थे:
- आदर्श फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. महेश बंदेवार
- पं. रविकांत शास्त्री
- लता नागले (जन अभियान परिषद परामर्शदाता)
- वृक्ष मित्र रविंद्र
- मंजुलता विश्वकर्मा
- कांता प्रसाद विश्वकर्मा
- डॉ. एन.के. सोमकुंवर
- डॉ. ओ.पी. विश्वकर्मा
- दिशा योगा क्लास की योगा टीचर दीक्षा बिसेन
- स्वच्छता ब्रांड एंबेसेडर बादल भारद्वाज
- विनीता नेटी
- पल्लवी
- स्वाति
- अलका शुक्ला
- आयशा लोधी
- स्वच्छता टीम की अंकिता सोनी
- सीएमसीएलडीपी के छात्र-छात्राएं
- कॉलोनी निवासी: वंदना बिसेन, पूजा दत्ता, शारदा साहू, भावना ठाकुर, ललिता ठाकुर, संतोष सोनी, बलदेव साहू, भागवत प्रसाद, प्रतीक्षा बिसेन
- डॉ. मीरा पराड़कर
- तथा अन्य समाजसेवी

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यह कार्यक्रम सिद्धि विनायक नगर विकास समिति के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसने स्थानीय स्तर पर आयुर्वेद और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन की सफलता से स्पष्ट है कि ऐसे प्रयास समाज को स्वास्थ्य और प्रकृति संरक्षण की दिशा में प्रेरित करते रहेंगे।

