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स्वर्ग जैसे नजारा हैं मां महिषासुर मर्दिनी चैतुरगढ़ का, ऊपरी पर्वत का क़िले से देखते ही बनती है चारो तरफ की खूबसूरती

अतुल्य भारत चेतना
वीरेंद्र यादव


पाली चैतमा। चैतूरगढ़ (छत्तीसगढ़ का कश्मीर) वह क़िला एवं रहस्यमय धरोहर जिसे कल्चुरी राजवंश के राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने सबसे लंबे समय में और सबसे अधिक मजबूत पर्वत को घेर कर चौंक बन्द कर वर्ष संवत 821 यानी 1069 ई.के लगभग किया था और पर्वत के ऊपरी हिस्से में ही माता महिषा सुर मर्दीनी का विशाल मंदिर बनवाया यह नागर शैली में बना हुआ है इस मंदिर में विराजित माता की दुर्लभ मूर्ति के बारे में कहा जाता है इस मूर्ति को कुछ समय तक लगातार देखने से आपको लगेगा कि यह मूर्ति पलक झपकाते आपको ही देख रही है इस किले के तीन द्वारा मेनका, हुमकारा, सिंहद्वार के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर के करीब ही शंकर गुफा भी स्थित है जो लगभग 25 फीट लंबी होगी ।


यह स्थान दुर्लभ और जंगली क्षेत्र में स्थित है सुनसान में स्थित है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 3060 फीट है यह प्राचीन धरोहर है यहां आम दिनों में जाना ठीक नहीं होता तथा केवल नवरात्रि या विशेष पर्व पर ही लगने वाली भीड़ के साथ ही जाना सुरक्षित होता है लोग जाते भी इसी समय ही है जंगली जानवरो का डर बना होता है कभी भी अकेले न जाए ।

जिला कोरबा के पाली से 19 किमी की दूरी पर छत्तीसगढ़ का यह ऐतिहासिक क़िला स्थित है । अगर यह क्षेत्र को भव्य रूप में विकसित किया जाता तो जैसे छत्तीसगढ़ के अन्य पर्वतीय माता के मंदिर जैसे मां बम्लेश्वरी मंदिर और मध्य प्रदेश के मैहर की माता शारदा देवी आदि की तरह यह क्षेत्र में भी हर मौसम में लोग दर्शन करने जाते।

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News Desk

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