हर्षोल्लास से मनाया गया लोकपर्व छेरछेरा
रतनपुर, भारत विभिन्न लोक परम्पराओं एवं तीज त्योहारों का देश है। प्रत्येक राज्य की अपनी अपनी लोक परम्परा एवं लोक पर्व है। इन लोक पर्व एवं लोक परम्पराओ में छत्तीसगढ़ राज्य की अपनी अलग पहचान है।
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छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है दिसंबर के महिने में किसान अपनी धान की फसल को खेतों से घर ले आते हैं इस खुशी में किसान धान का दान करते हैं जिसे छेरछेरा का पर्व कहते हैं। छेरछेरा का पर्व प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस वर्ष भी ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में लोक पर्व छेरछेरा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
सभी मोहल्लों में सुबह से ही बच्चे, नौजवान, बुजुर्ग सभी टोली के साथ छेरछेरा मांगने निकले। प्रभात फेरी की टोलियां भी घरों में छेरछेरा मांगने निकले। ‘छेर छेरा कोठी के धान ल हेरते हेरा’ पारम्परिक बच्चों का यह नारा भी गलियों में सुनाई दिया।
इस त्योहार में चिवड़ा गुड़ खाने की परम्परा में। सभी घरों में लोगों ने चिवड़ा गुड़ का आनंद लिया। छेरछेरा मांगने वाले टोलियों ने अपने अपने हिसाब से त्योहार मनाए ।
सभी पर्वों की तरह ही छेरछेरा का लोकपर्व प्रेम एवं भाईचारे का त्योहार है। त्योहारों के आंतरिक संदेश को आज हमें आत्मसात करने की जरूरत है और तभी हम अपने धर्म की रक्षा कर पायेंगे और सही मायने में मानव कहलाने के हकदार होंगे।

