राज्य सूचना आयोग लखनऊ ने RTI में समय पर सूचना न देने पर लगाया आर्थिक दंड
अतुल्य भारत चेतना ( मेहरबान अली कैरानवी )
कैराना। उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग, लखनऊ ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)-2005 के प्रावधानों के उल्लंघन पर कैराना तहसीलदार अर्जुन चौहान पर 25 हजार रुपये का आर्थिक अर्थदंड लगाया है। यह दंड निर्धारित समयावधि के भीतर मांगी गई सूचना उपलब्ध न कराने के कारण लगाया गया है। आयोग ने जुर्माने की राशि तहसीलदार के वेतन से वसूल करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
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मामला क्या है?
यह प्रकरण इमरान नामक व्यक्ति द्वारा दायर RTI आवेदन से जुड़ा है। आवेदक ने ग्राम पंचायत बधूपुरा के खसरा संख्या-91 में स्थित सरकारी तालाब पर अवैध कब्जे के संबंध में निम्नलिखित सूचनाएं मांगी थीं:
- तालाब से अवैध कब्जाधारियों की बेदखली के आदेश
- कब्जा हटाने से पहले एवं बाद की तस्वीरें
- अतिक्रमण विरोधी अभियान की रिपोर्ट
- गणना शीट
- हर्जाना वसूली मांग-पत्र
- क्षतिपूर्ति वसूली से संबंधित चालान एवं रसीदों की प्रमाणित प्रतियां
आवेदन दिनांक 05 जनवरी 2024 को लोक सूचना अधिकारी (PIO) के रूप में तहसीलदार कैराना को प्रस्तुत किया गया था।
निर्धारित समय सीमा में सूचना नहीं दी गई
RTI अधिनियम के अनुसार 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन तहसीलदार द्वारा निर्धारित समयावधि में कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद आवेदक ने प्रकरण को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष रखा और अंततः यह मामला राज्य सूचना आयोग, लखनऊ तक पहुंचा।
आयोग की सुनवाई और फैसला
आयोग द्वारा विस्तृत सुनवाई के पश्चात तहसीलदार कैराना को दोषी पाया गया। आयोग ने दिनांक 06 जनवरी 2025 को तहसीलदार अर्जुन चौहान पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया।
आयोग ने अतिरिक्त निर्देश दिए हैं कि:
- यह राशि तहसीलदार कैराना के वेतन से पांच मासिक किश्तों में वसूल की जाए।
- वसूली का कार्य लेखाधिकारी/कोषाधिकारी द्वारा सुनिश्चित किया जाए।
महकमे में हड़कंप
राज्य सूचना आयोग की इस कड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। यह फैसला RTI अधिनियम के सख्त अनुपालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां लोक सेवकों को समयबद्ध एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध कराने के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएंगी।

