अतुल्य भारत चेतना संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर –छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण वनांचल अबूझमाड़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। गढ़बेंगाल–धौड़ाई–छोटेडोंगर–ओरछा मार्ग (63 किलोमीटर) की बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना का भूमिपूजन कल छत्तीसगढ़ शासन के वन, परिवहन एवं सहकारिता मंत्री तथा नारायणपुर विधायक केदार कश्यप के करकमलों से ग्राम छोटेडोंगर में संपन्न होगा।यह सड़क परियोजना केदार कश्यप के निरंतर प्रयास, दृढ़ संकल्प और जनभावनाओं के प्रति प्रतिबद्ध नेतृत्व का परिणाम मानी जा रही है।
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वर्षों से दुर्गमता के कारण उपेक्षित रहे अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए यह परियोजना विकास की नई सुबह लेकर आई है।करीब 188 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा। इसके पूर्ण होने से गढ़बेंगाल, धौड़ाई, छोटेडोंगर, ओरछा सहित दर्जनों ग्रामों के हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग न केवल दूरी को कम करेगा, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी व्यापक परिवर्तन लाएगा।
मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में इस सड़क परियोजना से प्रशासनिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्थाओं को नई मजबूती मिलेगी।आपातकालीन सेवाओं की त्वरित पहुँच संभव होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और आम नागरिकों को जिला व विकासखंड मुख्यालय तक पहुँचने में अब सुविधा मिलेगी। यह सड़क अबूझमाड़ के लिए सेवा, सुरक्षा और सुशासन की मजबूत कड़ी बनेगी।
पर्यटन, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
केदार कश्यप की पहल से यह सड़क परियोजना अबूझमाड़ को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। क्षेत्र के जलप्रपात, घने जंगल, सुरम्य घाटियाँ और विशिष्ट आदिवासी संस्कृति अब बाहरी दुनिया से बेहतर रूप में जुड़ सकेंगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थायी गति प्राप्त होगी।
अबूझमाड़ के भविष्य का मजबूत आधार
अबूझमाड़, जो कभी दुर्गमता के कारण विकास से दूर रहा, आज राज्य एवं केंद्र की भाजपा सरकार तथा मंत्री केदार कश्यप के समर्पित प्रयासों से तेज़ी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है। गढ़बेंगाल से ओरछा तक बनने वाली यह सड़क केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और परिवर्तन का प्रतीक है। यह सड़क आने वाले वर्षों में अबूझमाड़ के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्वरूप को नई दिशा देगी।

