नए साल के दिन कामवन धाम में आये पंजाब के भक्तों अपार भीड़
ससंवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
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डीग – नए साल क़े दिन कामवन नगरी में बंगा पंजाब से आये भक्तों की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। हालात ये हैं हो गये कि पैर रखने तक की जगह नहीं मिली । तीर्थराज विमलकुण्ड भीड़ से भर गया है।
साल 2025 खत्म हो गया और नया साल 2026 ने दस्तक दे दी है । सेवाअधिकारी ने बताया कि नए साल की शुरुआत आध्यात्मिक तरीके से करने के लिए बंगा से श्रद्धालु कामवन तीर्थ स्थल पर आये।
उन्होंने बताया कि कामवन सदियों से ब्रज 84 कोस यात्रा का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। यह वही पावन भूमि है जहां श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रास-लीलाओं और गोचारण से जुड़ी अनगिनत स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। यहां के प्राचीन मंदिर, पौराणिक कुंड और तपस्वियों की साधना स्थली ब्रज संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जो केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना को भी सहेज कर रखती हैं। भारी संख्या में श्रद्धालु कामवन स्थित विमल बिहारी मंदिर पहुंचे तथा तीर्थराज की परिक्रमा ढोल बाजों क़े साथ की तथा सभी मंदिरों क़े दर्शन व पूजन किया।
सभी भक्तों ने कामवन विराजित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों चरणपहाड़ी ,भोजनथाली ,भामासुर की गुफा ,खिसलनी शिला ,दाऊजी के चरण ,कठ्ला, मुकुट ,कामेश्वर महादेव,वृंदा देवी ,गोपीनाथ जी ,
चौरासी खंभा ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड सहित अनेकों श्री कृष्ण की पावन व पुनीत लीला व क्रीड़ास्थलियों के दर्शन किये तथा केदारनाथ व बदरीनाथ दर्शन करने चले गये ॥

