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₹1 भोजनालय की पहल : भारत में सबसे पहले प्रयागराज से उठी आवाज़ हन्जला ने किया पहल

₹1 भोजनालय की पहल : भारत में सबसे पहले प्रयागराज से उठी आवाज़ हन्जला ने किया पहल

प्रयागराज।

देश में संचालित विभिन्न खाद्य योजनाओं के बावजूद आज भी करोड़ों गरीब, मजदूर, रिक्शा चालक, फुटपाथ विक्रेता, बेघर, वृद्ध एवं असहाय नागरिक ऐसे हैं जिन्हें प्रतिदिन पका हुआ भोजन सम्मानपूर्वक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी गंभीर मानवीय समस्या को देखते हुए इलाहाबाद जनकल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद हन्जला ने भारत में सर्वप्रथम ₹1 में तैयार भोजन उपलब्ध कराने वाले भोजनालय की पहल प्रयागराज से की है।

इस संबंध में मोहम्मद हन्जला ने माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में मांग की है कि प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से प्रारंभ करते हुए देश के प्रत्येक शहर, कस्बे एवं नगर में सरकारी अथवा सरकारी सहयोग से संचालित ₹1 भोजनालय शीघ्र स्थापित किए जाएँ।

हन्जला ने कहा कि “राशन और कच्चा अनाज उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। जिन नागरिकों के पास न घर है, न चूल्हा, न गैस और न भोजन पकाने की व्यवस्था — उनके लिए पका हुआ भोजन ही वास्तविक सहारा है।”

उन्होंने बताया कि आज भी बड़ी संख्या में लोग दिनभर कठिन परिश्रम करने के बावजूद रात को खाली पेट सोने को विवश हैं, जो किसी भी सभ्य और संवेदनशील राष्ट्र के लिए चिंताजनक स्थिति है।

इलाहाबाद जनकल्याण समिति ने मांग की है कि इन ₹1 भोजनालयों में स्वच्छ, पौष्टिक एवं सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराया जाए तथा इनके संचालन में केंद्र और राज्य सरकारों का समन्वय सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पारदर्शिता का कठोरता से पालन किया जाए।

समिति का कहना है कि यदि यह योजना पूरे देश में लागू होती है तो भूख, कुपोषण और भुखमरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा, भिक्षावृत्ति में कमी आएगी और गरीब व वंचित वर्ग को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। इससे “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की भावना भी साकार होगी।

इलाहाबाद जनकल्याण समिति ने स्पष्ट किया है कि यह मांग किसी व्यक्ति या संस्था के हित में नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र और मानवता के हित में उठाई गई है। यदि इस विषय पर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो समिति संविधान एवं लोकतंत्र के दायरे में रहते हुए शांतिपूर्ण जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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News Desk

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