संवाददाता: जितेन्द्र कुमार
अतुल्य भारत चेतना
जयपुर (राजस्थान)
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जयपुर में स्वच्छता को लेकर एक अनोखा अभियान चलाया जा रहा है।
जयपुर में नगर निगम के “10 दिन–10 स्थल” महा स्वच्छता अभियान ने शहर में व्यापक स्तर पर सघन सफाई की। 10 दिन–10 स्थल” अभियान का उद्देश्य न केवल सफाई और अतिक्रमण हटाना है, बल्कि शहरवासियों में स्वच्छता जागरूकता को बढ़ावा देना भी है। नगर निगम के अधिकारी का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि जयपुर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाया जा सके।इस महा स्वच्छता अभियान ने स्पष्ट कर दिया है कि शहरवासियों की भागीदारी और प्रशासनिक तत्परता के साथ जयपुर जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता के मॉडल शहर के रूप में उभर सकता है।
अभियान के दौरान सफाई कर्मचारियों को नियमित और समयबद्ध सफाई के निर्देश भी दिए गए. मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कर्मचारियों के कार्य की प्रशंसा करते हुए उन्हें इसी तरह आगे भी जिम्मेदारी से काम करने के लिए प्रेरित किया।
सुधार के लिए नागरिक भूमिका:
अगर जयपुर के नागरिक कचरा न फैलाएँ, तो शहर और भी साफ हो सकता है। सरकार के साथ-साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
नगर निगम की अधूरी कोशिश
जयपुर में साफ-सफाई के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करने और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (SUP) के खिलाफ अभियान चल रहे हैं, जैसे कपड़े/जूट के थैले इस्तेमाल करना और ‘स्वच्छ जयपुर’ के तहत प्लास्टिक-मुक्त बनने की कोशिश करना।लेकिन कोई ठोस कदम नहीं और न ही कोई सख्त कारवाही की जा रही है।
प्लास्टिक प्रदूषण कम करना एक चुनौती है: जयपुर नगर निगम और अन्य संस्थाएँ सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (जैसे पॉलिथीन) पर रोक लगाने और कपड़े या जूट के थैलों के उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं ताकि शहर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाया जा सके। लेकिन नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित करने में सरकार और नगर निगम को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
जयपुर में साफ-सफाई के संदर्भ में प्लास्टिक एक दोधारी तलवार है: एक तरफ इससे होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ सफाई के लिए प्लास्टिक के उपकरणों का उपयोग भी होता है। पूर्णरूप से प्लास्टिक पॉल्यूशन कम करने में सरकार और नगर निगम विफल नजर आ रहे है
जिसका मुख्य कारण है, ठोस कार्रवाई में ढ़ीलापन।प्लास्टिक पॉल्यूशन के खिलाफ नागरिकों में आजतक सही तरीके से संदेश नहीं पहुंचा पा रहे हैं।

