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कामवन विमलकुंड में स्नान और दीपदान से जन्म-जन्मांतर के दोष नष्ट होते हैं – संजय लवानिया

कामवन विमलकुंड में स्नान और दीपदान से जन्म-जन्मांतर के दोष नष्ट होते हैं – संजय लवानिया

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता भरतपुर

कामां – डीग जिले के कस्बा कामां कामवन धाम में आज पठानकोट पंजाब क़े सैकड़ों भक्तों ने तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित विमल बिहारी मन्दिर क़े दर्शन व पूजन कर आचमन किया। 

कामवन सदियों से ब्रज 84 कोस यात्रा का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। यह वही पावन भूमि है जहां श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रास-लीलाओं और गोचारण से जुड़ी अनगिनत स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। यहां के प्राचीन मंदिर, पौराणिक कुंड और तपस्वियों की साधना स्थली ब्रज संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जो केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना को भी सहेज कर रखती हैं।

मन्दिर विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने तीर्थराज का आध्यात्मिक माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि मान्यता है कि इस कुंड में स्नान और दीपदान से जन्म-जन्मांतर के दोष नष्ट हो जाते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने कुंड के तट पर दीप जलाए और अपने परिवार, समाज व राष्ट्र की मंगलकामना की। दीपों की झिलमिल रोशनी और मंत्रोच्चार ने वहां उपस्थित हर व्यक्ति को एक अलौकिक अनुभव प्रदान किया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि जिस आनंद और शांति की अनुभूति कामवन में होती है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। यहां के कण-कण में कृष्ण लीला की स्मृति बसती है। यही कारण है कि ब्रज 84 कोस यात्रा में कामवन का विशेष स्थान है और यहां पहुंचकर यात्रा मानो अपने चरम आध्यात्मिक शिखर को छू लेती है।

शास्त्रों के अनुसार विमल बिहारी के दर्शन मात्र से मन को शांति, आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

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मनमोहन गुप्ता

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